आगरा में मुस्लिम महापंचायत का प्रदर्शन:सरपंच बोले-जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चला तो मेरे ऊपर से जाएंगा, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन


रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को तोड़े जाने की प्रशासनिक तैयारियों के विरोध की आग आगरा तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत ने सोमवार दोपहर 12 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर “हमें बुलडोजर नहीं, कलम और कॉपी चाहिए” और “शिक्षा के मंदिर का सम्मान करो” जैसे नारे लगे।
​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत के प्रदेश सरपंच नदीम नूर ने सरकार की इस कार्रवाई को पूरी तरह द्वेषपूर्ण और चुनावी एजेंडा करार दिया। उन्होंने कहा, “देश में जिस रफ्तार से आबादी बढ़ रही है, उसी अनुपात में शिक्षा के मंदिरों की भी जरूरत है। रामपुर और आसपास के जिलों के छात्रों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी। मौलाना मोहम्मद अली जौहर जैसी महान शख्सियत, जिन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया, उनके नाम पर बने शिक्षा के मंदिर को राजनीति की भेंट चढ़ाया जा रहा है।” सवाल उठाया कि लगभग साढ़े नौ साल के कार्यकाल के बाद अचानक चुनाव के ठीक पहले सरकार को इन 38 भवनों के अवैध होने की याद क्यों आई? उन्होंने मांग की कि यूनिवर्सिटी को ध्वस्त करने के बजाय सरकार कोई बीच का रास्ता निकाले। अगर तकनीकी रूप से निर्माण में कोई खामी है, तो भारतीय कानून के तहत पेनल्टी (जुर्माना) वसूल कर उसे वैध किया जाए या फिर सरकार इस यूनिवर्सिटी को पूरी तरह अपने अधीन ले ले। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि सरकार को नाम से आपत्ति है, तो इसका नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी कर दिया जाए, लेकिन इसे तोड़ा न जाए।
​प्रदर्शन के अंत में महापंचायत के पदाधिकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। नदीम नूर ने कहा कि यह देश के 140 करोड़ उन नागरिकों की आवाज है जो शिक्षा में विश्वास रखते हैं। यदि सरकार ने अपनी हठधर्मी नहीं छोड़ी और तानाशाही रवैया अपनाते हुए बुलडोजर चलाया, तो वे सोनम वांगचुक की तर्ज पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल करेंगे और सड़क से लेकर संसद तक मार्च निकालेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिर की रक्षा के लिए अगर बुलडोजर चला, तो पहली लाश नदीम नूर की होगी।

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