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गोरखपुर में हुई बारिश ने एक बार फिर नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। लालडिग्गी चौराहा और असुरन स्थित राप्ती कॉम्प्लेक्स शनिवार रात हुई बारिश के बाद तालाब में तब्दील हो गए। कई दुकानों और मकानों में पानी घुस गया, जिससे व्यापारियों को करोड़ों रुपये के नुकसान का दावा किया जा रहा है। गुस्साए व्यापारियों ने नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग की। लालडिग्गी के व्यापारियों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान यही हाल होता है। इस बार स्थिति इतनी खराब रही कि तीन-तीन फीट ऊंची की गई दुकानों और मकानों में भी पानी भर गया। कई दुकानदारों ने पहले ही जलभराव से बचने के लिए अपनी दुकानों का फर्श और दीवारें ऊंची करा ली थीं, लेकिन इसके बावजूद पानी अंदर घुस गया और लाखों रुपये का सामान खराब हो गया। सम्पवेल समय पर चलता तो नहीं होती इतनी तबाही समस्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष नितिन कुमार जायसवाल ने नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि लालडिग्गी में जलनिकासी के लिए सम्पवेल (पंपिंग स्टेशन) मौजूद है, लेकिन बारिश के दौरान रात में उसे नहीं चलाया गया। आरोप है कि डीजल बचाने के लिए पंप सुबह करीब सात बजे शुरू किया गया। यदि रात में ही पंप चालू कर दिया जाता तो जलभराव की नौबत नहीं आती और व्यापारियों को इतना नुकसान नहीं झेलना पड़ता। व्यापारियों का यह भी कहना है कि इस बार हुई बारिश शहर के 24 घंटे के रिकॉर्ड स्तर से काफी कम थी, फिर भी शहर का यह हाल हो गया। उनका सवाल है कि अगर इससे अधिक बारिश होती तो हालात कितने भयावह हो सकते थे। राप्ती कॉम्प्लेक्स फिर बना बारिश का शिकार दूसरी ओर असुरन स्थित राप्ती कॉम्प्लेक्स में भी एक बार फिर जलभराव ने व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। कॉम्प्लेक्स के अंदर पानी भरने से कई दुकानों और गोदामों में रखा सामान खराब हो गया। व्यापारियों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि हर बारिश में यही स्थिति बनती है। व्यापारियों का कहना है कि इस बार नाले की दीवार टूटने के कारण बड़ी मात्रा में पानी सीधे कॉम्प्लेक्स में घुस गया। उनका आरोप है कि यह नाला महज दो से ढाई साल पहले नगर निगम ने बनवाया था, लेकिन निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। जहां मजबूत आरसीसी दीवार होनी चाहिए थी, वहां कमजोर निर्माण किया गया, जिसकी वजह से पहली बड़ी बारिश में ही दीवार ढह गई।
लोगों ने की स्थायी समाधान की मांग
व्यापारियों ने कहा कि अब हर साल जलभराव के बाद सिर्फ सफाई और अस्थायी इंतजाम से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को स्थायी समाधान निकालना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि राप्ती कॉम्प्लेक्स के चारों ओर फाइबर शेड लगाया जाए ताकि बारिश का पानी सीधे परिसर में न पहुंचे। साथ ही नालों की दीवारों को मजबूत किया जाए, जलनिकासी व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाए और स्थायी हाई-कैपेसिटी पंप लगाए जाएं।
नगर निगम के खिलाफ किया प्रदर्शन
घटना के बाद बड़ी संख्या में व्यापारी मौके पर जुट गए और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। व्यापारियों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की। लालडिग्गी में अतुल कश्यप, आकाश गुप्ता, सुरेश जायसवाल, सौरभ सिंह, अजय केशरवानी, जय वर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, पुष्पक गुप्ता, हरिद्वार गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, रामजी कन्नौजिया और संजीत केशरवानी समेत कई व्यापारी मौजूद रहे।
वहीं राप्ती कॉम्प्लेक्स में असुरन व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, महामंत्री उपेंद्र शुक्ल, पूर्वांचल व्यापार मंडल के अध्यक्ष मणिनाथ गुप्ता सहित बड़ी संख्या में व्यापारियों ने नगर निगम और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई तथा स्थायी समाधान की मांग उठाई।
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