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लखनऊ के हुसैनगंज इलाके में शनिवार सुबह बंदरों के झुंड से बचने की कोशिश में एक ई-रिक्शा चालक पांचवीं मंजिल से नीचे गिर गया। गंभीर हालत में उसे बलरामपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद परिजनों ने क्षेत्र में लंबे समय से बंदरों के आतंक के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है। हुसैनगंज के फूलबाग निवासी जीतू सोनकर (40) ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। शनिवार सुबह वह रोज की तरह नींद से उठकर घर की छत पर टहलने गए थे। परिवार के मुताबिक, कुछ देर बाद छत पर मौजूद बंदरों के झुंड ने उन्हें घेर लिया। जान बचाने के लिए वह इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह पांचवीं मंजिल से नीचे गिर पड़े। गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो जीतू खून से लथपथ पड़े थे। परिजन उन्हें तत्काल बलरामपुर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के बड़े भाई रवि सोनकर ने बताया कि इलाके में लंबे समय से बंदरों का आतंक है। कई बार लोगों पर हमले हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम और वन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो उनके भाई की जान बच सकती थी। घटना की सूचना पर कैसरबाग पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस ने परिजनों से पूछताछ के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पूरे मामले की जांच की जा रही है। शहर में बढ़ता जा रहा बंदरों का आतंक लखनऊ के पुराने और नए दोनों इलाकों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हुसैनगंज, कैसरबाग, चौक, अमीनाबाद, आलमबाग, चारबाग, गोमतीनगर, इंदिरानगर, अलीगंज, महानगर, राजाजीपुरम, जानकीपुरम, आशियाना, विकासनगर, निरालानगर और डालीगंज समेत कई क्षेत्रों में लोग रोजाना बंदरों के आतंक का सामना कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि सुबह-शाम छत पर जाना, कपड़े सुखाना और बच्चों का खेलना भी जोखिम भरा हो गया है। लोगों ने खुद किए बचाव के इंतजाम प्रशासन से राहत नहीं मिलने पर लोगों ने अपने स्तर पर बचाव के उपाय शुरू कर दिए हैं। कई मकानों की छतों और बालकनियों में लोहे की जाली लगवाई गई है। खिड़कियों पर मजबूत ग्रिल और नेट लगाए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने छतों पर कांटेदार प्लास्टिक स्ट्रिप, चमकीली टेप और बंदरों को भगाने के लिए नकली लंगूर के पुतले लगाए हैं। कई लोग अब लाठी लेकर छत पर जाते हैं, जबकि छोटे बच्चों को अकेले छत पर भेजना भी बंद कर दिया गया है। पहले भी हो चुके हैं कई हादसे बंदरों के हमलों और उनसे बचने के प्रयास में शहर में पहले भी कई लोग घायल हो चुके हैं। कई मामलों में लोग छत से गिरने, सीढ़ियों से फिसलने या सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं। चिकित्सकों के अनुसार बंदरों के काटने और नोचने के मामलों में भी हर साल बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचते हैं।
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बंदरों से घबराकर 5वीं मंजिल से गिरा ई-रिक्शा चालक, मौत:हुसैनगंज में हादसा; रोज की तरह छत पर टहलने गया था, परिवार बोला- समय रहते कार्रवाई होती तो बच जाती जान