सीएसआईआर-एनबीआरआई में 9वां प्रो. केएन कौल स्मृति व्याख्यान:डॉ. हिमांशु पाठक ने 'नेक्स्ट-जेनरेशन एग्रीकल्चर' पर चर्चा की


लखनऊ स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में शनिवार को 9वें प्रो. केएन कौल स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केएन कौल ब्लॉक के लोटस प्रेक्षागृह में आयोजित हुईं। अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान , हैदराबाद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए । कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुए सीएसआईआर-एनबीआरआई के निदेशक डॉ. ए.के. शासनी ने कहा कि यह व्याख्यान श्रृंखला प्रो. कौल की बहुआयामी वैज्ञानिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। नेक्स्ट-जेनरेशन एग्रीकल्चर’ विषय पर विचार रखे अपने व्याख्यान में डॉ. हिमांशु पाठक ने ‘फूड टू न्यूट्रिशन, इनकम एंड एनवायरनमेंट सिक्योरिटी: नेक्स्ट-जेनरेशन एग्रीकल्चर’ विषय पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने बताया कि भारत ने खाद्यान्न संकट से लेकर खाद्य आत्मनिर्भरता और फिर खाद्य अधिशेष राष्ट्र बनने तक का लंबा सफर तय किया है। डॉ. पाठक ने कहा कि दुग्ध, मत्स्य, फल और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कई कृषि उत्पादों के मामले में भारत अब आयातक नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्यातक देश के रूप में स्थापित हो चुका है। उन्होंने बताया कि बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण और बदलती वैश्विक परिस्थितियों ने कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में उत्पादक, लाभकारी और टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आधुनिक कृषि क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं डॉ. पाठक ने जोर देकर कहा कि जीनोम एडिटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, बिग डेटा एनालिटिक्स और प्रिसिजन एग्रीकल्चर जैसी आधुनिक तकनीकें कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। इन तकनीकों के माध्यम से भविष्य की कृषि अधिक सक्षम, लचीली और पर्यावरण के अनुकूल बन सकेगी। उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जलवायु-अनुकूल फसलों, डिजिटल कृषि, स्मार्ट कृषि परामर्श सेवाओं, मजबूत कृषि विस्तार तंत्र तथा अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और किसानों के बीच प्रभावी साझेदारी को अत्यंत आवश्यक बताया।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *