लखनऊ में 129वीं नंदा जयंती समारोह:पूर्व कार्यवाहक PM के व्यक्तित्व-कृतित्व पर हुई चर्चा


लखनऊ में गुलजारीलाल नंदा स्मृति संस्थान के सहयोग से देश के पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री और भारत रत्न गुलजारीलाल नंदा की 129वीं जयंती मनाई गई। रिवर बैंक कॉलोनी स्थित संस्थान परिसर में आयोजित समारोह में उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और आदर्शों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने नंदा को सादगी, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का अद्वितीय उदाहरण बताया। संस्थान के सचिव ज्ञानी त्रिवेदी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि गुलजारीलाल नंदा देश की महान विभूतियों में से एक थे। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 1997 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया था। त्रिवेदी ने महात्मा गांधी के उस कथन का भी उल्लेख किया, जिसमें नंदा को व्यवस्था कौशल और सत्य का पुजारी बताया गया था। राजनीति में रहते हुए भी वे सत्ता के मोह से दूर रहे ज्ञानी त्रिवेदी ने नंदा के राजनीतिक जीवन की सादगी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सक्रिय राजनीति में रहते हुए भी वे सत्ता के मोह से दूर रहे। दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री और तीन प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में गृह मंत्री रहने के बावजूद उन्होंने न तो व्यक्तिगत संपत्ति अर्जित की और न ही परिवारवाद को बढ़ावा दिया। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान अब गांव-गांव में सदाचार समितियों का गठन कर नैतिक शिक्षा, राष्ट्रीय एकता और तंबाकू निषेध अभियानों को बढ़ावा देगा। नैतिक भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष गोपबन्धु पटनायक (सेवानिवृत्त आईएएस) ने की। उन्होंने नंदा को उच्च आदर्शों, सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति बताते हुए श्रमिक कल्याण और नैतिक मूल्यों के प्रति उनके योगदान को याद किया। विशिष्ट अतिथि आनंद वर्धन सिंह ने भ्रष्टाचार उन्मूलन और स्वस्थ सामाजिक परंपराओं के निर्माण में नंदा के प्रयासों पर जोर दिया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. मोहम्मद कामरान ने युवाओं से नंदा के सिद्धांतों को अपनाकर नैतिक भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

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