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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय का कीमती समय बर्बाद करने के लिए एक विपक्षी पक्षकार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने यह आदेश तब किया जब विपक्षी रामसागर सिंह के वकील सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुए। याची नारायणी प्रसाद सिंह ने याचिका में मांग की थी कि उसके ज्ञापनों पर मुख्य रजिस्ट्रार, फर्म, सोसायटी व चिट्स उत्तर प्रदेश को जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए। 6 हफ्ते में फैसला लेने को कहा था इससे पहले कोर्ट ने रजिस्ट्रार को छह सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इस आदेश के विरुद्ध विपक्षी रामसागर सिंह ने स्पेशल अपील की थी। अपील में कहा गया था कि उनका पक्ष सुने बिना ही आदेश कर दिया गया, जबकि याचिका में उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने जैसी मांगें थीं। दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने पिछले आदेश को रद्द कर दिया और मामले को दोबारा सुनने के लिए बहाल कर दिया। इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान विपक्षी रामसागर सिंह के वकील कोर्ट में मौजूद नहीं थे। इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्षी ने ही डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया था और अब वह स्वयं पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुआ इसलिए यह न्यायालय का समय बर्बाद करने जैसा है।
इसी के साथ कोर्ट ने विपक्षी रामसागर सिंह पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया। साथ ही मुख्य रजिस्ट्रार को याची के ज्ञापन पर सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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कोर्ट का समय बर्बाद करने पर 50 हजार रुपये जुर्माना:आदेश के बाद भी कोर्ट में मौजूद न रहने पर तल्ख टिप्प्णी के साथ आदेश