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इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अलीगढ़ के अकराबाद थाना क्षेत्र के एक हत्याकांड में जुगेंद्र सिंह, डिप्टी सिंह और रामवीर को अपराध से बरी कर दिया है।
तीनों को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अलीगढ़ ने 2 जून 2022 को धारा 302/34 आईपीसी और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जानिये क्या है मामला 9/10 अगस्त 2004 की रात करीब 2:15 बजे भगवान सिंह नामक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई पप्पू सिंह की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी नैहना उर्फ मन्नू, जुगेंद्र, रामवीर और डिप्टी ने तमंचों से हमला किया था।मकसद यह बताया गया कि नैहना के जुगेंद्र की बहन शशि से अवैध संबंध थे, जिसका विरोध मृतक ने किया था। कोर्ट ने कहा गवाहों की गवाही को “अस्वाभाविक और अविश्वसनीय” बताया गया।रात के अंधेरे में गहरी नींद में सोए लोगों का अचानक हमलावरों को पहचान लेना संदिग्ध पाया गया। घटनास्थल पर बिजली कनेक्शन न होने और मंदिर से चोरी की बिजली के दावे ने रोशनी में पहचान की बात कमजोर कर दी। मेडिकल रिपोर्ट में केवल एक गोली का घाव मिला, जबकि चश्मदीदों ने दो गोली चलने की बात कही यह विरोधाभास कोर्ट को गंभीर लगा। बरामद तमंचों की फोरेंसिक जांच में वे हत्या में इस्तेमाल हथियार से मेल नहीं खाए, और बरामदगी खुले, सार्वजनिक स्थानों से होना भी संदेह पैदा करता है। मकसद को भी अफवाह और सुनी-सुनाई बात पर आधारित मानते हुए “गढ़ा हुआ और बाद में जोड़ा गया” करार दिया गया। सबूत पेश करने में फेल कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, और ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन नहीं किया। नतीजतन दोनों अपीलें स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि रद्द कर दी गई और आदेश दिया गया कि तीनों अपीलकर्ता, यदि किसी अन्य मामले में वांछित न हों, तो तुरंत रिहा किए जाएं।
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22 साल पुराने हत्याकांड में तीनों दोषी बरी:ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द, अलीगढ़ के मामले में सारे सबूत फेल