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अंबेडकरनगर के सम्मनपुर थाना क्षेत्र में 17 साल पुराने दहेज हत्या के एक मामले में अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मृतका भूइला उर्फ सुशीला के पति और सास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला मृतका के पिता रामराजभर की शिकायत पर दर्ज किया गया था। उनकी बेटी भूइला उर्फ सुशीला (21 वर्ष) का विवाह लगभग 10 साल पहले अनिल राजभर से हुआ था। गौना एक साल पहले संपन्न हुआ था। रामराजभर के अनुसार गौने के समय दामाद अनिल और उसके जेठ नंदलाल व गोवर्धन ने बाइक की मांग की थी। बाइक न मिलने पर विदाई से इनकार कर दिया गया था, जिसके बाद काफी अनुनय-विनय के बाद सुशीला की विदाई हुई। ससुराल पहुंचने के बाद सुशीला को उसकी सास गेना और जेठानी शीला द्वारा दहेज में बाइक न मिलने के कारण लगातार प्रताड़ित किया जाता था। वह फोन पर अपने माता-पिता को इस बारे में बताती थी। 11 जून 2008 को रामराजभर को टेलीफोन पर सूचना मिली कि उनकी बेटी सुशीला की हत्या कर दी गई है। आरोप था कि उसके पति अनिल, जेठ गोवर्धन, नंदलाल, सास गेना और जेठानी शीला ने रस्सी से गला घोंटकर उसे मार डाला। सूचना मिलने पर जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो सुशीला कमरे में चारपाई पर मृत पाई गई। इस मामले में कोर्ट ने अभियुक्त अनिल और गेना देवी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी पाया। दोनों को कठोर आजीवन कारावास और 50,000-50,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। यदि वे अर्थदंड जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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17 साल पुराने दहेज हत्या मामले में पति-सास को उम्रकैद:अंबेडकरनगर में कोर्ट ने सुनाया फैसला, 50 हजार का जुर्माना भी