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अयोध्या में नजूल भूमि और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर कथित अतिक्रमण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नगर निगम और जिला प्रशासन को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन अभी तक कोर्ट के आदेश का पालन होता नहीं दिखाई दे रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकारी भूमि या सार्वजनिक मार्ग पर अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे कानून के अनुसार हटाया जाए। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजित शुक्ला की खंडपीठ ने उषा देवी बनाम राज्य सरकार व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नाका हनुमानगढ़ी से गुलाब नगर स्थित 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के किनारे नजूल भूमि पर अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। यातायात प्रभावित होने का लगाया आरोप याचिका में यह भी कहा गया कि सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण और अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे आम लोगों और श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीमांकन कराने के भी दिए निर्देश खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अयोध्या नगर निगम और जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कराएं। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित भूमि का सीमांकन भी कराया जाए। यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार उसे हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। दो महीने बाद फिर कोर्ट जाने की छूट हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दो महीने के भीतर प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है तो याचिकाकर्ता को दोबारा न्यायालय की शरण लेने की स्वतंत्रता रहेगी। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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हाईकोर्ट सख्त का आदेश का पालन नहीं हुआ शुरू:14 कोसी परिक्रमा मार्ग के अतिक्रमण पर दो महीने में कार्रवाई का दिखा था निर्देश