सोनभद्र में आधी रात को बुलडोजर से गिराया कच्चा मकान:पीड़ित का आरोप- दबंगों ने खाली करने की धमकी दी, पुलिस ने नहीं की कार्रवाई


सोनभद्र जिले में आधी रात को एक परिवार का कच्चा मकान बुलडोजर से गिराने का मामला सामने आया है। यह घटना राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के मुसही गांव की है। पीड़ित परिवार ने दबंगों पर मकान गिराने और पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। पीड़ित सुरेश कुमार के अनुसार, वह अपने ससुर स्व शोभा भारती की जमीन पर बने कच्चे मकान में परिवार सहित रहते हैं। उनके ससुर का निधन वर्ष 2020 में हुआ था। सुरेश का आरोप है कि 19 जुलाई को घुवास निवासी सौरभ मौर्या ने उनकी पत्नी को मकान खाली करने की धमकी दी थी। धमकी मिलने के बाद सुरेश कुमार ने चुर्क चौकी में प्रार्थना पत्र देकर पुलिस को सूचना दी थी। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया था कि कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि,उसी रात करीब 11 बजे 35-40 लोग बुलडोजर (जेसीबी) लेकर पहुंचे और मकान गिराना शुरू कर दिया। उस समय सुरेश की पत्नी आशा देवी घर में अकेली थीं।आरोप है कि दबंगों ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें पेड़ से बांध दिया। मकान गिराए जाने के दौरान घर का घरेलू सामान भी मलबे में दब गया।आशा देवी ने 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी,जिसके बाद चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे और घटना का जायजा लिया। सुरेश कुमार का दावा है कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा से मिलकर पूरे मामले की जानकारी दी।उनका आरोप है कि एसपी ने चौकी प्रभारी को बुलाकर मामले को राजस्व विवाद बताया और मुकदमा दर्ज करने को लेकर सवाल किया।पीड़ित के अनुसार, एसपी ने प्रार्थना पत्र से मंगलसूत्र छीनने की बात हटाने को कहा और ऐसा न करने पर मुकदमा दर्ज न करने की बात कही। इसके बाद पीड़ित ने सिविल कोर्ट की शरण लेने की बात कही है।इस मामले में पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने पीड़ित के दावों से अलग पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि उक्त मकान महिला का नहीं है। एसपी के अनुसार,वह मकान किसी दूसरे व्यक्ति से किराए पर लिया गया था और बाद में उसे अपना बताते हुए दावा किया गया,जबकि वहां कोई रहता भी नहीं था। एसपी ने बताया कि राजस्व विभाग से जांच कराई गई है और मकान शोभाराम के नाम दर्ज नहीं है। यहां बताने वाली बात है कि सौरव मौर्य अपना दल एस का जिला सचिव बताया जा रहा है, अपना दल एस के आशीष पटेल के साथ इसकी फोटो सोशल मीडिया और फेसबुक पर देखी जा सकती है, बड़ा सवाल है कि इस मामले ने पुलिस की भूमिका और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मकान के स्वामित्व को लेकर विवाद था तो उसका निर्णय सक्षम राजस्व अथवा न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए था।

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