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अयोध्या में श्रीराम के अप्रतिम गायक गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर अयोध्या में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। तुलसी चौरा पर आयोजित कार्यक्रम में गोस्वामी तुलसीदास का अभिषेक-पूजन किया गया। इसके बाद उनकी रचनाओं का पाठ हुआ। श्रद्धालुओं ने रामचरितमानस और गोस्वामी तुलसीदास के जीवन से जुड़े प्रसंगों को याद किया। तुलसी चौरा का गोस्वामी तुलसीदास से विशेष संबंध माना जाता है। मान्यता है कि करीब साढ़े चार सौ साल पहले उन्होंने इसी स्थान से रामचरितमानस के लेखन की शुरुआत की थी। जयंती के मौके पर यहां श्रद्धालुओं की आस्था की धारा नजर आई। तुलसी चौरा पर हुआ विग्रह का अभिषेक तुलसी चौरा और दंतधावनकुंड के पीठाधीश्वर महंत विवेक आचारी ने गोस्वामी तुलसीदास के विग्रह का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन किया। इसके बाद गोस्वामी जी की अन्य कृतियों का पाठ किया गया। कार्यक्रम में तुलसी चौरा के प्रबंधन से जुड़े समाजसेवी कौस्तुभ आचारी ने भी अपने विचार रखे। आज का जनमानस तुलसीदास के जरिए राम से परिचित: कौस्तुभ कौस्तुभ आचारी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि निश्चित रूप से अपूर्व और अप्रतिम हैं, लेकिन आज का जनमानस जिन श्रीराम और उनकी कथा से परिचित है, उसमें गोस्वामी तुलसीदास का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास के प्रति सच्ची निष्ठा केवल उनकी जयंती मनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। राम के प्रति सच्ची भक्ति और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही तुलसीदास के प्रति वास्तविक श्रद्धा होगी। राम की तरह तुलसीदास का स्मरण भी आत्मजागरण का प्रेरक कार्यक्रम के अंत में नीलमणि आचारी बादल ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की तरह गोस्वामी तुलसीदास का स्मरण भी व्यक्ति को आत्मजागरण की प्रेरणा देता है। जयंती समारोह के दौरान तुलसी चौरा पर भक्ति और राममय वातावरण बना रहा।
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अयोध्या में तुलसीदास जयंती पर गूंजे रामचरितमानस के स्वर:तुलसी चौरा पर हुआ अभिषेक-पूजन, राम के आदर्शों पर चलना ही पूजा