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सिद्धार्थनगर जिले में शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक रुक-रुक कर हल्की बारिश हुई। लंबे अंतराल के बाद हुई इस वर्षा से किसानों को राहत मिली है। बारिश के बाद खेतों में नमी बढ़ने से धान की रोपाई का काम फिर से तेज हो गया। जिले के विभिन्न गांवों में किसान सुबह से ही खेतों में उतरकर रोपाई करते नजर आए। पिछले कई दिनों से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण जिले में धान की रोपाई प्रभावित हो रही थी। खेतों में नमी की कमी से किसान रोपाई का कार्य समय पर पूरा नहीं कर पा रहे थे। हल्की बारिश के बाद अब किसानों को उम्मीद है कि मानसून की रफ्तार बढ़ने पर कृषि कार्य सामान्य हो जाएंगे। इस सीजन में अब तक केवल 172 मिमी वर्षा मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 19 जुलाई 2026 तक जिले में कुल 172 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम है। इस बार मानसून की धीमी चाल का सीधा असर खेती-किसानी पर देखने को मिल रहा है। कृषि विशेषज्ञ बोले- अच्छी फसल के लिए और बारिश जरूरी कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की बेहतर पैदावार के लिए आने वाले दिनों में लगातार और पर्याप्त बारिश जरूरी है। यदि मानसून जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। किसान भी अब अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए हुए हैं, ताकि रोपाई का कार्य समय पर पूरा किया जा सके। सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर की 19 जुलाई की दैनिक गेज रिपोर्ट के अनुसार जिले की सभी प्रमुख नदियां फिलहाल सामान्य स्थिति में बह रही हैं। बाणगंगा नदी के जलस्तर में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह अभी भी खतरे के निशान से 3.72 मीटर नीचे है। राप्ती नदी के साथ परसोहन घाट, मुंचोरवा घाट, ककरही पुल, आलमनगर, उस्का रेलवे पुल, लोटन पुल, तेलार नाला और नौगढ़ पुल पर भी जलस्तर सामान्य बना हुआ है। जिले में फिलहाल बाढ़ का कोई खतरा नहीं है।
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सिद्धार्थनगर में बारिश से धान की रोपाई को मिली रफ्तार:रातभर रुक-रुक कर हुई बारिश, जिले की सभी नदियां खतरे के निशान से नीचे