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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी पेट्रोल पंप की डीलरशिप केवल संदेह या अनुमान के आधार पर समाप्त नहीं की जा सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि तेल कंपनी डीलरशिप रद्द करती है, तो उसे ठोस तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों से यह साबित करना होगा कि ईंधन वितरण मशीन में छेड़छाड़ हुई थी और उसके लिए संबंधित डीलर जिम्मेदार था। न्यायमूर्ति इरशाद अली ने यह आदेश बलरामपुर के तुलसीपुर स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के डीलर सरदार बलदेव सिंह एंड कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने कहा कि मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस के तहत डीलरशिप समाप्त करना एक गंभीर दंडात्मक कार्रवाई है। इसलिए, ऐसी कार्रवाई केवल विश्वसनीय तकनीकी जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है। यदि आरोप केवल संदेह, अनुमान या परिस्थितिजन्य तथ्यों पर आधारित हों, तो डीलरशिप समाप्त करने का निर्णय कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतर सकता। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने 4 जुलाई 2017 को पारित डीलरशिप समाप्ति के आदेश और 15 मई 2018 के अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को छह सप्ताह के भीतर डीलरशिप बहाल करने तथा याचिकाकर्ता को सभी परिणामी लाभ देने का भी निर्देश दिया।
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लखनऊ हाईकोर्ट ने रद्द की पेट्रोल पंप डीलरशिप:कहा- संदेह या आशंका पर कठोर कार्रवाई नहीं