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कानपुर देहात में एक गरीब मजदूर की 13 वर्षीय बेटी के इलाज में पैसों की कमी बाधा बन गई है। पिता का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में भी मुफ्त इलाज नहीं मिला और ऑपरेशन के लिए 10,500 रुपये का अनुमानित खर्च बताया गया है। पिता ने अब बेटी के इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है। यह मामला कानपुर देहात के रसूलाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम कारेरामपुर का है। गांव निवासी रिंकू की 13 वर्षीय बेटी शिवांगी बरसात के दौरान सीढ़ियों से गिर गई थी, जिससे उसका हाथ टूट गया। परिजन उसे एंबुलेंस से पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
रिंकू का आरोप है कि 10 जुलाई शुक्रवार शाम को जिला अस्पताल पहुंचने पर बेटी को भर्ती नहीं किया गया। स्टाफ ने कथित तौर पर यह कहकर वापस भेज दिया कि अस्पताल में मच्छर बहुत हैं और उन्हें कहीं रिश्तेदारी में रुकने की सलाह दी गई। अगले दिन, शनिवार को जब वे दोबारा अस्पताल पहुंचे, तो ऑपरेशन के लिए 10,500 रुपये का खर्च बताया गया। रिंकू के अनुसार, पैसे न होने की बात बताने पर उन्हें कहीं और इलाज कराने की सलाह दी गई और एक मोबाइल नंबर देकर खर्च की जानकारी लेने को कहा गया। गरीब मजदूर रिंकू का कहना है कि चार बच्चों का पालन-पोषण करना ही मुश्किल है, ऐसे में ऑपरेशन के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके लिए असंभव है। उन्होंने फिलहाल बेटी को मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया है, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए 10,500 रुपये का अनुमानित खर्च बताया है। इस संबंध में, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरमीत सिंह ने बताया कि शासन की ओर से इम्प्लांट उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, इसलिए इम्प्लांट की लागत मरीज को स्वयं वहन करनी पड़ती है। वहीं, क्षेत्रीय विधायक पूनम शंखवार ने मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद का आश्वासन दिया है।
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रुपयों के लिए अटका गरीब बेटी का इलाज:ऑपरेशन के लिए 10 हजार 500 रुपए का एस्टीमेट मिला, पिता ने लगाई मदद की गुहार