प्रयागराज में 60 से अधिक सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे:शनिवार को जिले भर में आयोजित थाना समाधान दिवस में अवैध कब्जों की शिकायतें आईं


प्रयागराज में 60 से अधिक सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का खुलासा हुआ है। शनिवार को जिले की सभी तहसीलों में आयोजित थाना समाधान दिवस के दौरान इन अतिक्रमणों की शिकायतें दर्ज की गईं। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को इन कब्जों को तत्काल खाली कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। ये अवैध कब्जे मुख्य रूप से चकमार्ग, खलिहान और बंजर भूमि पर हुए हैं। जिले भर से प्राप्त रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी ने इस गंभीर समस्या पर संज्ञान लिया। अतिक्रमण के मामलों में सोरांव तहसील सबसे आगे रही, जहां से 13 शिकायतें प्राप्त हुईं। इसके अतिरिक्त, बारा और हंडिया तहसीलों में भी 10-10 गंभीर शिकायतें दर्ज की गईं। हंडिया में उतरांव और सराय ममरेज थाना क्षेत्रों से जितेंद्र कुमार, राजेश कुमार बिंद, अभिषेक, दिलीप कुमार, महंत रामानंद गिरि और राम अचल सहित कई लोगों ने अतिक्रमण की शिकायतें कीं। फूलपुर में अदनान अहमद, महेंद्र कुमार, प्रेम शंकर, राधेश्याम और माधो प्रसाद की शिकायतों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि की। कोरांव में बृजेश सिंह, राम रतन सिंह, राजेश कुमार और लालता प्रसाद पर सरकारी भूमि पर कब्जा करने के गंभीर आरोप लगे, जिस पर उपजिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए। मेजा में खलिहान और चकमार्ग की निशानदेही को लेकर तनाव की स्थिति रही, जबकि करछना में सुमित कुमार, विमला देवी और दिलीप कुमार की शिकायतों पर टीम भेजी गई। सदर तहसील के पुरामुफ्ती इलाके में भी फूलचंद पासी, आदित्य पटेल, महेंद्र कुमार और कल्याण सिंह की शिकायतों पर लेखपालों की टीम ने मौका मुआयना किया। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों ने राजस्व टीमों के साथ मौके पर पहुंचकर शिकायतों का निस्तारण शुरू किया। मेजा के ग्राम बडिड्डा में पट्टेदारों को कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी की गई। हालांकि, हंडिया और कोरांव जैसे क्षेत्रों में प्रभावशाली लोगों द्वारा सरकारी जमीन से कब्जा खाली कराना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद टीम आती तो है, लेकिन कब्जेदार फिर से जमीन पर काबिज हो जाते हैं, जिससे समस्या जस की तस बनी रहती है। राजस्व टीम की कार्यप्रणाली पर सवाल
एक ही दिन में 60 से अधिक शिकायतों का सामने आना यह दर्शाता है कि प्रयागराज में सरकारी जमीनों को लेकर कोई डर नहीं बचा है। चकमार्ग बंद होने से ग्रामीणों का आवागमन बाधित है और खलिहानों पर पक्के निर्माण खड़े हो चुके हैं। यदि डीएम के आदेश के बाद भी सरकारी जमीनों को अतिक्रमणमुक्त कर उन्हें सुरक्षित नहीं रखा गया, तो आने वाले दिनों में यह और मुसीबत बनेंगे।

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