रामलला दिनभर झूले पर देंगे दर्शन-तृतीया को कुबेर टीला जाएंगे:अयोध्या में पुजारियों का ड्रेस कोड होगा, संतों के नियमित दर्शन पास बनेंगे


अयोध्या में रामलला के दर्शन और आगामी झूलनोत्सव की तैयारियों को लेकर शनिवार देर शाम धार्मिक समिति की बैठक हुई। इसमें श्रद्धालुओं को ज्यादा समय तक झूलनोत्सव के दर्शन कराने, संतों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था, रामलला के अर्चकों की वेशभूषा और भगवान के भोग को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में तय किया गया कि श्रृंगार आरती के बाद चारों भाइयों समेत रामलला झूले पर विराजमान होंगे और दिनभर झूले पर ही दर्शन देंगे। दोपहर में भोग के समय कुछ देर के लिए पट बंद रहेंगे। इसके बाद फिर झूले पर दर्शन शुरू होंगे। इससे सावन में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक समय तक झूलनोत्सव के दर्शन मिल सकेंगे। 15 अगस्त को कुबेर टीला जाएंगे रामलला धार्मिक समिति ने अयोध्या की परंपरा के अनुसार झूलनोत्सव को लेकर भी निर्णय लिया है। 15 अगस्त यानी तृतीया को शाम के समय रामलला उत्सव के लिए कुबेर टीला जाएंगे। यहां झूलनोत्सव के बाद रामलला मंदिर लौटेंगे। 15 से 28 अगस्त तक प्रतिदिन शाम को 2 से 3 घंटे विशेष झूलनोत्सव और दर्शन की व्यवस्था रहेगी। साधु-संतों और विशिष्टजनों के सुगम दर्शन के लिए भी व्यवस्था तय की गई है। दर्शन के इच्छुक संतों को अयोध्या आने से कम से कम एक दिन पहले सूचना देनी होगी। इसके लिए ट्रस्ट और धार्मिक समिति ने आचार्य इंद्रदेव को अधिकृत किया है। सूचना मिलने के बाद संतों को सम्मानपूर्वक बैठाने और दर्शन कराने की व्यवस्था की जाएगी। रामानंद परंपरा के मुताबिक होगी अर्चकों की वेशभूषा रामलला के अर्चकों की वेशभूषा को लेकर भी निर्णय लिया गया। अर्चकों की वेशभूषा रामानंद परंपरा के अनुरूप होगी। वे नीचे धोती और ऊपर अचला धारण कर सकेंगे। इसके अलावा पीले रंग के रेशमी वस्त्र पहनने का विकल्प भी रहेगा। केश और दाढ़ी को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है। अर्चक या तो पंचकेश की परंपरा का पालन करेंगे या पूरी तरह से केश-विहीन रहेंगे। दाढ़ी बनाकर केवल बाल रखने की व्यवस्था नहीं होगी। रामानंद परंपरा के अनुसार अर्चकों के लिए तिलक धारण करना भी सुनिश्चित किया जाएगा। पूरी, सब्जी, खीर और मालपुआ का लगेगा भोग झूलनोत्सव के दौरान रामलला को प्रतिदिन विशेष भोग लगाया जाएगा। इसमें पूरी, सब्जी, खीर और मालपुआ समेत अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल रहेंगे। पूजा-अर्चना और भोग की परंपराएं निर्धारित विधि-विधान के अनुसार जारी रहेंगी। अयोध्यावासियों और संतों को बिना शर्त नियमित दर्शन पास बैठक में अयोध्यावासियों और साधु-संतों के लिए रामलला के नियमित दर्शन पास बनाने पर भी चर्चा हुई। तय किया गया कि पास बिना किसी शर्त के बनाया जाए। पास धारकों के लिए रोजाना दर्शन करने या महीने में निर्धारित संख्या में दर्शन करने की कोई सीमा नहीं होगी। इससे अयोध्यावासी और संत नियमित रूप से रामलला के दर्शन कर सकेंगे। ये संत रहे बैठक में मौजूद बैठक में युगपुरुष स्वामी परमानंद जी महाराज (हरिद्वार), स्वामी गोविंद देवगिरी जी महाराज, मणिराम दास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास शास्त्री, निर्मोही अखाड़ा के महंत जिनेंद्र दास, उडुपी के स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ, रामकथा कुंज के महंत डॉ. रामानंद दास और हनुमत निवास के महंत डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण समेत धार्मिक समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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