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लखनऊ में बढ़ती ई-रिक्शा संख्या और बारिश में जलभराव की समस्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई हुई। राज्य सरकार और नगर निगम ने यातायात नियंत्रण व जल निकासी सुधारने के कदमों की जानकारी दी। सूरज सिंह विशेन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया गया कि ई-रिक्शा संचालन नियंत्रित करने के लिए नौ सदस्यीय समिति बनी है। इसमें राजस्व, एलडीए, ट्रैफिक, पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी हैं। समिति को दस दिन में रिपोर्ट देनी है, जो 11 या 12 अक्टूबर तक आने की संभावना है। लखनऊ के ड्रेनेज प्लान के लिए 5 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। योजना बनाने का काम जल निगम की सहायक संस्था सीएनडीएस को मिला है। टेंडर के बाद एनसीपीई प्राइवेट लिमिटेड का चयन हुआ है। पॉलीटेक्निक चौराहे से कामता चौराहे के बीच अतिक्रमण हटाने के बाद 50 लोगों ने दोबारा कब्जा किया था, जिनके चालान हुए हैं। अधिकारियों ने सार्वजनिक सड़कों पर दोबारा अतिक्रमण रोकने का अभियान जारी रखने का भरोसा दिलाया।
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यातायात व्यवस्था के लिए 9 सदस्यीय समिति का होगा गठन:लखनऊ में ड्रेनेज प्लान के लिए 5 करोड़ रुपए मंजूर, 10 दिन में रिपोर्ट मांगा