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रामलला व उप मंदिरों के पुजारियों के लिए लागूं ड्रेस के दायरे में कोठारी -भण्डारी व सेवक भी आ गये है। भण्डारी वह है जो कि रामलला समेत सभी मंदिरों के देवी-देवताओं के लिए भोग-प्रसाद का निर्माण करते हैं। कोठारी वह है जो भोग प्रसाद के निर्माण की वस्तुओं का संग्रह कर आवश्यकता के अनुसार भण्डारी को सामग्री उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा सेवक जो सहायक के रूप में सहयोग के साथ सीता रसोई की साफ-सफाई रखते हैं। यहां दो शिफ्टों में अलग-अलग चार-चार कर्मचारी हैं जिनमें दो कोठारी, चार भण्डारी व दो सेवक के रूप में सेवा देते हैं।
यह सभी आठों कर्मचारी राम मंदिर की आधुनिक सीता रसोई जो कि परकोटे में मां अन्नपूर्णा के उप मंदिर के बगल में स्थापित है, में कार्यरत हैं। इन सभी के लिए पुजारियों की भांति धोती के साथ पीताम्बरी धारण करने का निर्देश हुआ है। यह निर्देश धार्मिक न्यास समिति की ओर से दिया गया है। इस निर्देश का अनुपालन राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि के द्वारा पारित आदेश पर शुरू हो गया है। इसके पहले यह सभी कर्मचारी धोती-कुर्ता में ही कार्यरत थे लेकिन अब वह घर से मंदिर तक इच्छा नुसार वस्त्र धारण कर सकतें हैं लेकिन सीता रसोई में प्रवेश से पहले पूरी शुद्धता के साथ निर्धारित ड्रेस धोती व पीताम्बरी धारण करके ही रसोई में कदम रखेंगे। इनका वेतनमान नहीं तय हो सका है
परकोटे के उप मंदिरों व शेषावतार मंदिर में नियमित पूजा अर्चना के लिए अतिरिक्त पुजारियों की जरूरत के बाद भी उनका प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं शुरू हो सका। फिलहाल तात्कालिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर राम मंदिर ट्रस्ट के श्रीराम निवास मंदिर में कार्यरत संगठन से जुड़े मंदिर के पुजारियों व अनुष्ठान कर्ता आचार्यों को नियुक्ति दे दी गई है। हालांकि रामलला के पुजारियों की तरह इनका वेतनमान नहीं सुनिश्चित किया गया है बल्कि मानदेय निर्धारित किया गया है। इसके चलते इन पर ड्रेस कोड लागू नहीं किया गया है। ड्रेस कोड की अनिवार्यता नहीं होने के कारण यह सभी पुजारी व आचार्य गण धोती कुर्ता में ही मंदिर में सेवा दे रहे हैं।
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रामलला के कोठारी-भंडारी पर भी लागू हुआ ड्रेस कोड:पुजारियों की तरह पीले रंग का वस्त्र धारण करने का निर्देश