मेरठ की जेल से बाहर निकली पाकिस्तानी मूल की सबा:179 दिन बाद रिहाई हुई, बेटे फराज के गले लगकर फफक पड़ी, घर के सदस्य भावुक हुए


मेरठ में ब्याही पाकिस्तान मूल की महिला सबा फरहत गुरुवार शाम जेल से बाहर आ गईं। करीब 179 दिन सबा फरहत को जेल में रहना पड़ा। बेटे फराज को देखकर वह भावुक हो गईं। उसे गले से लगा लिया। घर पहुंचीं तो वहां का माहौल भी बदला था। परिवार के सभी सदस्य उनकी रिहाई पर शुक्रिया अदा कर रहा था। सबा ने किसी से बात नहीं की। वह सारा वक्त अपने परिवार के साथ बिताना चाहती हैं। पहले एक नजर डालिए पूरे मामले पर
14 फरवरी, 2026 को मेरठ के देहलीगेट थाना क्षेत्र की कोठी अतानस निवासी रुकसाना खान पत्नी अयाज अहमद की तरफ से देहलीगेट थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई। रुकसाना का आरोप था कि पाकिस्तान मूल की सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया और उनकी पुत्री ऐमन फरहत फर्जी दस्तावेजों और पासपोर्ट के जरिए खुद को भारतीय नागरिक दर्शाकर अवैध रूप से मेरठ में रह रही हैं। उन्होंने बताया कि देहलीगेट की नादिर अली बिल्डिंग निवासी फरहत मसूद ने पाकिस्तान जाकर सबा फरहत से निकाह किया था। निकाह के बाद उनके तीन बच्चे हुए। आरोप था कि वर्ष 1993 में पाकिस्तान में जन्मी बेटी ऐमन फरहत अपनी मां के पासपोर्ट के आधार पर भारत आई और मेरठ के सोफिया स्कूल में पढ़ाई की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ऐमन ने भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं की, बावजूद इसके फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसका जन्म प्रमाण पत्र और भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया गया। यह भी आरोप लगाए गए सबा पर
सबा फरहत पर दो अलग-अलग नामों से वोटर आईडी बनवाने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पाकिस्तान समेत कई देशों की यात्रा करने के भी आरोप लगाए गए थे। शिकायत में यह भी दावा किया गया था कि सबा के पिता हनीफ अहमद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े रहे हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने सबा फरहत को पूछताछ के लिए बुलाकर गिरफ्तार कर लिया था। निचली अदालत से जमानत हुई खारिज
गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत में जमानत याचिका डाली गई। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सबा पक्ष ने कहा था कि उन्होंने कभी वोटर आईडी के लिए आवेदन ही नहीं किया और न ही कभी विदेश यात्रा की हैं। उन्होंने इससे जुड़े कुछ साक्ष्य भी कोर्ट के समक्ष पेश किए हालांकि निचली अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। मुकदमे से ऐमन आउट और मसूद इन
मुकदमे में पहले सबा फरहत और उनकी बेटी ऐमन फरहत को नामजद किया गया था, लेकिन बाद में ऐमन का नाम हटा दिया गया। इसके बाद पुलिस ने सबा के पति मसूद फरहत को आरोपी बनाया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने पाकिस्तान में जन्मी बेटी का मेरठ के एक निजी अस्पताल से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया था। जांच के दौरान पुलिस ने मुकदमे में विदेशी अधिनियम की धारा 14-ख भी जोड़ दी। क्रमवार जानिए सबा पक्ष की दलीलों को शियोरिटी बॉन्ड धनराशि हुई 50 हजार
हाईकोर्ट में सबा फरहत की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी व मोहम्मद असलम ने मजबूती से पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने सबा फरहत को जमानत देते हुए व्यक्तिगत मुचलकों और 25-25 हजार के दो बॉन्ड के आधार पर रिहा करने के आदेश दिए। एडवोकेट वीके शर्मा बताते हैं कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद यहां कोर्ट ने बॉन्ड की राशि दोगुनी कर दी। इसके बाद शियोरिटी बॉन्ड 25 हजार से 50 हजार कर दिया गया है। सारे दस्तावेज जमा करा दिए गए हैं जो सत्यापन के लिए भेजे गए। सात दिन और करना पड़ा इंतजार
6 अगस्त को हाईकोर्ट की तरफ से सबा फरहत को जमानत मिल गई। माना जा रहा था कि दो दिन के भीतर वह रिहा हो जाएंगी लेकिन कांवड़ यात्रा की व्यस्तता के कारण सबा फरहत की जमानत के दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो सका। जमानत मिलने के 7 दिन बाद सबा फरहत को रिहाई मिल सकी। बेटा फराज अहमद अपनी मां सबा फरहत को लेकर घर पहुंचा तो हर कोई भावुक दिखाई दिया। रात में ऐनम घर लौटी तो मां के गले लगकर खूब रोयीं।

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