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चित्रकूट की जीवनरेखा मानी जाने वाली मंदाकिनी नदी इन दिनों गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। नदी में काई, जलकुंभी और कूड़े का अंबार लगा है। कई खुले नाले सीधे मंदाकिनी में गिर रहे हैं, जिससे जल लगातार प्रदूषित हो रहा है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय प्रशासन, साधु-संतों और श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के निर्देश पर रामघाट पर मंदाकिनी नदी के कायाकल्प के लिए व्यापक सफाई अभियान चलाया जा रहा है। नदी की तलहटी से काई, जलकुंभी और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को आधुनिक मशीनों और श्रमिकों की सहायता से हटाया जा रहा है। इस परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल-13, बांदा) को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है। इसकी देखरेख में नारायण इंजीनियर्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड सफाई कार्य कर रही है। जिलाधिकारी स्वयं अभियान की नियमित समीक्षा कर रहे हैं ताकि कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा हो सके। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि जल्द ही एक ऐसी परियोजना शुरू की जाएगी, जिससे मंदाकिनी में गिरने वाले नालों को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इससे नदी में प्रदूषण का स्तर काफी कम होगा और जल की गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंदाकिनी नदी चित्रकूट की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। इसकी स्वच्छता हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन के साथ आमजन भी सहयोग करें, तभी मंदाकिनी का प्राकृतिक स्वरूप सुरक्षित रह सकेगा।
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मंदाकिनी नदी को प्रदूषण मुक्त करने का अभियान तेज:चित्रकूट में रामघाट पर सफाई शुरू, गंदे नाले गिरने पर जल्द लगेगी रोक