BHU के सेमेस्टर परीक्षा में ब्राह्मणवादी पितृसत्ता पर सवाल:इतिहासकार बोले-आजकल इस शब्द का प्रयोग करना अफसोसजनक,BHU ने कहा-प्रश्न पाठ्यक्रम से जुड़ा है


बीएचयू की सेमेस्टर परीक्षा में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ पर पूछे गए सवाल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक विज्ञान संकाय के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित एमए इतिहास चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में ‘आधुनिक भारतीय समाज में महिलाएं’ विषय के पेपर में यह प्रश्न शामिल किया गया था। प्रश्न में पूछा गया था, “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता शब्द से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस प्रकार ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली।” तीन घंटे की इस परीक्षा में कुल 70 अंकों के प्रश्न पूछे गए थे। पेपर को तीन सेक्शन में विभाजित किया गया था, जिसमें चार वैकल्पिक प्रश्न, तीन लघु उत्तरीय और दो दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल थे। परीक्षा में पूछे गए इस सवाल को लेकर शिक्षकों और इतिहासकारों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। प्रोफेसर बोले- इस तरह के शब्दों का प्रयोग संवेदनशील इतिहास विभाग की प्रोफेसर अनुराधा सिंह ने कहा कि “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” एक अकादमिक शब्द है, जो 1990 के दशक में अधिक प्रचलन में आया। उनके अनुसार, शब्दों और अवधारणाओं का अर्थ समय, स्थान और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस तरह के शब्दों का प्रयोग संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे सामाजिक मतभेद बढ़ने की आशंका रहती है। प्रो. अनुराधा सिंह का कहना है कि प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति का मूल्यांकन करते समय पूरे भारतीय समाज को एक समान मान लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसी विशेष क्षेत्र या कालखंड की स्थितियों के आधार पर पूरे देश की सामाजिक संरचना का निष्कर्ष निकालना सही दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता। उस पेपर के अन्य सवाल – वैकल्पिक सेक्शन में- मुगल भारत में हरमों की क्या भूमिका थी। गेरडा लर्नर की किताब क्रिएशन ऑफ पितृसत्ता के मुख्य तर्क क्या थे। ये किताब मेसोपोटेमिया में महिलाओं की प्रताड़ना से जुड़ी है। दीर्घउत्तरीय सेक्शन में पूछा गया कि औपनिवेशिक काल यानी कि अंग्रेजी शासन में भारतीय महिलाओं के लिए किस प्रकार के अलग-अलग शैक्षिक अवसर खुले। ये उनके निजी और सार्वजनिक जीवन के अंतर को तोड़ने में कितने प्रभावी थे। पाठ्यक्रम के अनुसार बना प्रश्न,विवाद से जोड़ना ठीक नही इस विवाद पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा में पूछा गया प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम के अंतर्गत था और उसे पूरी तरह शैक्षणिक संदर्भ में शामिल किया गया था। प्रशासन ने कहा कि इस विषय को अनावश्यक विवाद से जोड़ना उचित नहीं है।

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