भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राकेश टिकैत का हमला:बोले, "देश को गुलाम बनाने वाला समझौता, किसान हितों की अनदेखी हुई तो होगा आंदोलन"


भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने कड़ा विरोध जताया है। बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यह समझौता देशहित में नहीं, बल्कि देश को आर्थिक रूप से गुलाम बनाने वाला सौदा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डील में किसानों के हितों की अनदेखी की गई तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। नोएडा में आयोजित प्रेस वार्ता में टिकैत ने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल (यूएसटीआर) प्रमुख जैमीसन ग्रीयर की 23 और 24 जून को नई दिल्ली यात्रा के दौरान समझौते पर अंतिम चर्चा होनी है, लेकिन सरकार ने किसानों से इस मुद्दे पर कोई राय नहीं ली। उन्होंने कहा कि 21 जनवरी 2021 के बाद सरकार से उनकी कोई बातचीत नहीं हुई। किसानों को यह तक नहीं बताया गया कि समझौते से उन्हें क्या लाभ होगा। अमेरिका से सस्ता माल आया तो बर्बाद हो जाएगा किसान
राकेश टिकैत ने कहा कि यदि अमेरिका से अनाज, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल बड़े पैमाने पर भारत आए तो यहां के किसान तबाह हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे। उनका आरोप था कि वर्तमान सरकार व्यापारियों की सरकार है और इसमें जवाबदेही नहीं है। भारत को डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने देंगे
बीकेयू के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौता किसानों पर सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर किसानों के हितों की रक्षा की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और हर देश यहां अपना सामान खपाना चाहता है, लेकिन भारतीय किसानों के भविष्य को लेकर सरकार गंभीर नहीं दिख रही। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका से खाद्य तेल आएगा तो देश के सोयाबीन उत्पादक किसानों का क्या होगा। उनका कहना था कि अमेरिका अपने किसानों को 70 प्रतिशत तक सब्सिडी देता है, जबकि भारत में यह करीब 3 प्रतिशत है। ऐसे में भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। जीरो ड्यूटी पर अमेरिकी सामान, भारतीय किसानों पर 18% का बोझ
युद्धवीर सिंह ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित समझौते में अमेरिकी उत्पादों पर शून्य शुल्क लगाने की बात हो रही है, जबकि भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में देश का किसान बर्बाद हो जाएगा और बीकेयू इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।

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