महराजगंज में तीन बच्चों की मौत के बाद ठेकेदार गिरफ्तार:अधूरी परियोजना और एक ही तालाब पर दो टेंडर जारी होने से उठे नए सवाल


महराजगंज के सिसवा नगर पालिका के मीराबाई नगर स्थित निर्माणाधीन अमृत सरोवर में तीन मासूम बच्चों की मौत के बाद अब हादसे से आगे बढ़कर पूरे प्रकरण में जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की तहरीर पर निर्माण एजेंसी के संचालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विन्ध्याचल की तहरीर पर कोठीभार पुलिस ने दीपक कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोपराइटर दीपक कुमार सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। आरोप है कि निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे, जिसके चलते तीन बच्चों की जान चली गई। नगर पालिका की निगरानी पर भी उठ रहे सवाल घटना के बाद स्थानीय नागरिक और समाजसेवी यह सवाल उठा रहे हैं कि करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग होती और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाता, तो इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था। लोगों का यह भी कहना है कि यदि पहले शिकायतें मिली थीं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए। एक ही तालाब पर दो योजनाओं के टेंडर बने चर्चा का विषय जानकारी के अनुसार, अमृत 2.0 योजना के तहत 7 जनवरी 2025 को अमृत सरोवर के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण के लिए करीब 1.52 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। यह कार्य छह महीने में पूरा होना था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी निर्माण अधूरा है। इसी बीच 22 जून 2026 को राज्य वित्त आयोग मद से इसी तालाब के पुनर्जीवन एवं सौंदर्यीकरण के लिए करीब 1.69 करोड़ रुपये का एक और टेंडर जारी किया गया। एक ही परियोजना से जुड़े दो अलग-अलग टेंडरों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। नगर पालिका का पक्ष नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी का कहना है कि राज्य वित्त आयोग की योजना के तहत स्वीकृत दूसरे टेंडर पर अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है। हालांकि स्थानीय लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब पहली परियोजना पूर्ण नहीं हुई थी, तब दूसरी योजना स्वीकृत करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। निष्पक्ष जांच की मांग स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन यदि परियोजना की निगरानी में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि जांच में सभी संबंधित पक्षों की भूमिका की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। तीन बच्चों की मौत के बाद यह मामला केवल एक हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की निगरानी, सुरक्षा मानकों के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब लोगों की नजर प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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