बीएचयू में उप-पुस्तकालयाध्यक्ष प्रोन्नति विवाद::हाईकोर्ट ने चयन समिति के गठन, कुलपति की शक्तियों पर मांगा जवाब


इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सी. ए. एस) के तहत उप-पुस्तकालयाध्यक्ष(डिपुटी लाईब्रेरियन), अकादमिक लेवल -14 पद पर प्रोन्नति से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्र सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने याचिका में उठाए गए गंभीर कानूनी प्रश्नों पर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। क्या है मामला जानिये यह याचिका याचिकाकर्ता दुर्गेश सिंह, डिपुटी लाईब्रेरियन, हिन्दी विभाग द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने बीएचयू के विजिटर (कुलाध्यक्ष) को प्रेषित उनकी याचिका/आवेदन खारिज करने के आदेश दिनांकित 22 जून, 2026 तथा चयन समिति की बैठक के कार्यवृत्त दिनांक 16.10.2024 को चुनौती दी है। एपीआई मानदंडों की अनदेखी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए हाईकोर्ट के समक्ष बहस के दौरान कहा कि एपीआई(API) मानदंडों की अनदेखी, चयन समिति द्वारा किसी भी अभ्यर्थी को अंक प्रदान नहीं किया गया : यूजीसी विनियम, 2016 के तहत निर्धारित न्यूनतम एपीआई मानदंडों और अंक-भार का पालन नहीं किया गया और किसी भी अभ्यर्थी को चयन समिति द्वारा अंक प्रदान नहीं किया गया जो युजीसी नियमावली का उल्लंघन है। चयन समिति के गठन में अनियमितता: यूजीसी विनियम 2016 के नियम 5.1.7 व 5.1.1 के तहत चयन समिति में संबंधित संकाय के संकायाध्यक्ष की उपस्थिति अनिवार्य है, जिसे इस मामले में नजरअंदाज किया गया और कला संकाय के संकायाध्यक्ष को चयन समिति का अंग नहीं बनाया गया । कुलपति की आपातकालीन शक्तियों का अवैध प्रयोग बीएचयू अधिनियम 1950 की धारा 7C(5) और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (शिक्षा मंत्रालय) के दिनांक 11.06.2001 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, सीएएस (CAS) प्रोन्नति जैसे नियमित प्रशासनिक मामलों में कुलपति अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। अदालत ने विश्वविद्यालय कि अधिवक्ता पुजा अग्रवाल के अनुरोध पर उन्हें जबाबी हलफनामा दायर करने और 11.06.2001 के शिक्षा मंत्रालय के ज्ञापन पर निर्देश प्राप्त करने हेतु दो सप्ताह का समय दिया है। युजीसी के अधिवक्ता धनंजय अवस्थी को विशेष रूप से हलफनामें पर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है कि क्या केंद्रीय विश्वविद्यालय सीएएस प्रोन्नति में आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं या नहीं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है, तो अदालत सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। मामले की अगली सुनवाई 07 सितंबर 2026 को शीर्ष-10 मामलों में सुचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।

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