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कानपुर के चिड़ियाघर में एक की चिता पर बिजनौर की मादा बाघिन और तेंदुए का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। दोनों को ही बिजनौर से रेसक्यू किया गया, मादा तेंदुआ 7 साल से कानपुर जू में रही, तो बाघिन ने बिजनौर से कानपुर जू आने के रास्ते में ही दम तोड़ दिया। दोनो का पोस्टमार्टम भी कानपुर के जू में शनिवार शाम को किया गया। कानपुर प्राणि उद्यान में शनिवार को दो वन्यजीवों की मौत हो गई। इनमें बिजनौर से रेस्क्यू कर लाई गई मादा तेंदुआ ‘जेरी’ और अमानगढ़ से उपचार के लिए लाई जा रही एक वृद्ध मादा बाघिन शामिल हैं। दोनों का तीन पशुचिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम कराया, जिसके बाद शवों का विधिवत दाह संस्कार कर दिया गया। 2019 में बिजनौर से लाई गई थी जेरी
कानपुर प्राणि उद्यान में वर्ष 2019 से रह रही मादा तेंदुआ ‘जेरी’ को बिजनौर से रेस्क्यू कर लाया गया था। 7 अप्रैल 2026 को उसने असामान्य व्यवहार करते हुए अपनी ही पूंछ काटकर गंभीर रूप से घायल कर लिया था। इसके बाद उसे सेप्टीसीमिया (रक्त संक्रमण) हो गया था। तब से लगातार पशु चिकित्सकों की सघन निगरानी में उसका उपचार चल रहा था, लेकिन शनिवार को उसने दम तोड़ दिया।
बिजनौर के अमानगढ़ लाई जा रही वृद्ध बाघिन की मौत
इसी क्रम में बिजनौर के अमानगढ़ क्षेत्र से रेस्क्यू की गई एक वृद्ध मादा टाइगर को बेहतर चिकित्सीय उपचार के लिए कानपुर प्राणि उद्यान लाया जा रहा था। हालांकि कानपुर पहुंचने से करीब 40 किलोमीटर पहले ही रास्ते में उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद शेरनी का भी तीन पशुचिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम कर शव का अंतिम निस्तारण कराया। जांच के लिए भेजे जाएंगे नमूने
दोनों वन्यजीवों की मौत के कारणों की विस्तृत जांच के लिए उनके ऊतक (टिश्यू) के नमूने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
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बिजनौर की मादा तेंदुआ और बाघिन एक चिता पर जले:कानपुर जू में 3 डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमॉर्टम, सैंपल जांच के लिए बरेली भेजेंगे