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उत्तर प्रदेश में वकीलों की फर्जी डिग्रियों की जांच के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना रुख साफ रखा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हाल ही में 105 वकीलों पर एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर की गई एक याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को साफ मना कर दिया। यह आदेश क्रिमिनल रिट याचिका संख्या 22168/2026 (राजेश सिंह बनाम स्टेट बार काउंसिल व अन्य) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। सुनवाई में याचिकाकर्ता राजेश सिंह की ओर से वकील यशवीर सिंह यादव पेश हुए। उन्होंने अपने आवेदन पर जोर नहीं दिया और उसे वापस लेने का अनुरोध किया। इसके बाद कोर्ट ने इस याचिका को रद्द कर दिया। इस मामले में स्टेट बार काउंसिल की ओर से वकील अशोक कुमार तिवारी ने अपना पक्ष रखा। बता दें कि कुछ दिन पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश (रिट याचिका संख्या 12231/2026 में 3 जून 2026 को पारित आदेश) के पालन में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने 105 ऐसे वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इन वकीलों की लॉ डिग्रियां जांच में फर्जी पाई गई थीं। इसी पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए वकीलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर राहत मांगी थी। आज बार काउंसिल की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया कि कोर्ट ने ऐसी ही एक याचिका खारिज कर दी है। यह पूरी जांच बार काउंसिल ऑफ इंडिया के ‘सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) नियम, 2015’ के तहत की जा रही है। इसके तहत राज्य में रजिस्टर्ड सभी वकीलों के शैक्षणिक दस्तावेजों का वेरिफिकेशन उनकी संबंधित यूनिवर्सिटी और बोर्ड से कराया जा रहा है।
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फर्जी डिग्री वाले वकील की FIR रद्द करने की याचिका:105 फर्जी डिग्री वाले वकीलों पर कार्रवाई जारी रहेगी