पोर्टल पर एंट्री नहीं करने की सजा किसानों को नहीं:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP सरकार की दलीलें खारिज कीं, कहा- 30 दिन में भुगतान करें


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसानों के हक में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि सरकारी क्रय केंद्र पर अनाज जमा करने के बाद पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री नहीं होने की सजा किसानों को नहीं दी जा सकती। यदि किसी अधिकारी या क्रय केंद्र प्रभारी की लापरवाही, धोखाधड़ी या गबन के कारण ऑनलाइन फीडिंग नहीं हुई है तो उसका खामियाजा किसान नहीं भुगतेगा। कोर्ट ने प्रादेशिक को-ऑपरेटिव फेडरेशन (PCF) और संबंधित राज्य अधिकारियों को आठ किसानों को उनके बेचे गए गेहूं का बकाया भुगतान एक महीने के भीतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के हिसाब से करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने श्रवण कुमार व 7 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 5 अन्य मामले की सुनवाई करते हुए दिया। 206 क्विंटल गेहूं जमा किया, रसीद भी मिली मामला मऊ जिले के लाखीपुर स्थित PCF गेहूं क्रय केंद्र का है। रबी विपणन वर्ष 2021-22 में आठ किसानों ने क्रय केंद्र पर कुल 206 क्विंटल गेहूं जमा किया था। गेहूं की खरीद ₹1,975 प्रति क्विंटल की दर से हुई थी। क्रय केंद्र प्रभारी यासिर अराफात ने किसानों को गेहूं प्राप्ति की रसीदें जारी कर दीं, लेकिन ई-उपार्जन पोर्टल पर गेहूं की ऑनलाइन फीडिंग नहीं की। इसके चलते महीनों बीतने के बाद भी किसानों को उनकी फसल का भुगतान नहीं मिला। भुगतान नहीं मिलने पर किसानों ने शिकायत की। जांच में आरोप सामने आया कि क्रय केंद्र प्रभारी ने जानबूझकर ऑनलाइन फीडिंग नहीं की और धनराशि का गबन कर लिया। इसके बाद मऊ के कोतवाली थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई और उसे निलंबित कर दिया गया। सरकार ने कहा- ऑनलाइन रिकॉर्ड जरूरी सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और PCF की ओर से दलील दी गई कि रबी खरीद नीति के तहत ऑनलाइन भुगतान ई-प्रोक्योरमेंट और ई-पॉप रसीद के आधार पर ही किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना था कि केवल हस्तलिखित रसीदों के आधार पर भुगतान नहीं किया जा सकता। यह भी कहा गया कि जांच पूरी होने तक राज्य पर किसानों को भुगतान करने की जिम्मेदारी नहीं बनती। कोर्ट ने कहा- प्रशासनिक गलती का नुकसान किसान क्यों भुगते? हाईकोर्ट ने सरकार और PCF की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब किसानों ने सरकारी क्रय केंद्र पर अपना गेहूं जमा कर दिया और उन्हें उसकी रसीद भी मिल गई, तो उसके बाद पोर्टल पर एंट्री नहीं होना प्रशासनिक और संस्थागत विफलता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि क्रय केंद्र प्रभारी की धोखाधड़ी या गबन विभाग और संबंधित कर्मचारी के बीच का मामला है। इसके कारण किसानों का वैध भुगतान नहीं रोका जा सकता। 30 दिन में ₹1,975 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका में दर्ज गेहूं की मात्रा का सत्यापन कर आठों किसानों को ₹1,975 प्रति क्विंटल की दर से पूरा बकाया भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाए। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और PCF आरोपी क्रय केंद्र प्रभारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखने के लिए स्वतंत्र हैं। सरकारी धन के नुकसान की भरपाई भी आरोपी से कानून के मुताबिक की जा सकती है।

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