दलित परिवार का आरोप- 10 लाख का वादा:कानपुर देहात में 7 महीने बाद भी आर्थिक सहायता का इंतजार


कानपुर देहात में एक दलित परिवार अपनी बेटी की मौत के सात महीने बाद भी न्याय और आर्थिक सहायता के लिए भटक रहा है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए बड़े-बड़े आश्वासन अब तक पूरे नहीं हुए हैं, जिससे परिवार को निराशा हाथ लगी है। यह मामला रूरा थाना क्षेत्र के अमौली ठाकुरान गांव का है। पीड़ित पिता रामखिलावन के अनुसार, गांव के ही एक युवक ने उनकी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद बेटी गहरे मानसिक आघात में चली गई और उसने आत्महत्या का प्रयास किया। गंभीर हालत में उसका कई अस्पतालों में इलाज चला, लेकिन अंततः उसकी मौत हो गई। हर संभव मदद का भरोसा परिजनों का आरोप है कि घटना के 54 दिन बाद ही एफआईआर दर्ज की जा सकी। बेटी की मौत के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, अंतिम संस्कार का खर्च और हर संभव मदद का भरोसा दिया था। इन आश्वासनों पर विश्वास कर परिवार ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर बेटी का शव दफना दिया था। पीड़ित परिवार का कहना है हालांकि, सात महीने बीत जाने के बाद भी परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि अब समाज कल्याण विभाग केवल 2 लाख रुपये की सहायता देने की बात कह रहा है, जबकि पहले 10 लाख रुपये का आश्वासन दिया गया था। परिवार को बेटी की कब्र पर चबूतरा बनवाने के लिए भी उधार लेना पड़ा, और उन्हें अब तक कोई ठोस आर्थिक मदद नहीं मिली है। इस संबंध में डिप्टी एसपी संजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने आर्थिक सहायता के लिए समाज कल्याण विभाग को अपनी रिपोर्ट भेज दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन द्वारा स्वीकृत होने वाली आर्थिक सहायता का भुगतान समाज कल्याण विभाग के माध्यम से ही किया जाता है। पुलिस के अनुसार, सहायता राशि तय करने का अधिकार संबंधित विभाग का है।

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