तारीख पर तारीख में निकल गए 34 साल:जज वादी और वकील आरोपी; कोर्ट का फैसला 34 साल बाद आया; सबूतों के अभाव में दोनों आरोपी बरी

‘तारीख पर तारीख’ का दौर जब सिस्टम की लापरवाही से जुड़ जाए, तो इंसाफ की आस भी दम तोड़ने लगती है। बुलंदशहर की अदालत से आया एक फैसला पूरे न्यायिक और अभियोजन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिस मुकदमे में वादी खुद एक न्यायिक मजिस्ट्रेट थे और कटघरे में वकील, उसका अंतिम…

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यूपी की जिला अदालतों की सुस्ती पर हाईकोर्ट चिंतित:कोर्ट ने कहा- 16 साल में 178 तारीखें, फिर भी आरोप तय नहीं, ये शुभ संकेत नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में मुकदमों की सुस्त रफ्तार और जिला न्यायपालिका द्वारा मांगी गई जानकारी न देने पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने चार याचिकाओं की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला 26 मई 2026 को सुरक्षित रख लिया था। और 28 सितंबर 26 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा…

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हाईकोर्ट में अपहरण मामले की सुनवाई में लगे 24 साल:तारीख पे तारीख आती रही और आरोपी ने पीड़िता से शादी कर ली, 3 बच्चे भी हुए

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अपहरण मामले में अहम जानकारी सामने आई तो जज चिंतित हो गए। जज ने कहा कि तारीख पे तारीख की स्थिति को देश की न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं बनने दिया जा सकता। दरअसल, 2001 में एक पिता ने 15 साल की बेटी के अपहरण का आरोप एक व्यक्ति पर लगाया…

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दलित परिवार का आरोप- 10 लाख का वादा:कानपुर देहात में 7 महीने बाद भी आर्थिक सहायता का इंतजार

कानपुर देहात में एक दलित परिवार अपनी बेटी की मौत के सात महीने बाद भी न्याय और आर्थिक सहायता के लिए भटक रहा है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए बड़े-बड़े आश्वासन अब तक पूरे नहीं हुए हैं, जिससे परिवार को निराशा हाथ लगी है। यह मामला रूरा थाना क्षेत्र के अमौली ठाकुरान गांव…

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