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गोरखपुर में शुक्रवार को हुई रिकॉर्ड 110.2 mm बारिश ने नगर निगम के दावों की पोल खोल दी। तेज बारिश के बाद शहर का शायद ही कोई इलाका बचा हो, जहां जलभराव न हुआ हो। कई जगहों पर घंटों तक पानी भरा रहा और शनिवार रात तक भी कुछ इलाकों में लोगों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ा। दैनिक भास्कर ने जाने की कोशिश की आखिर पूरा शहर कैसे डूब गया। अलग लोगों से बात करते पता चला कि- नगर निगम की लापरवाही, शहर में हो रहे निर्माण कार्य में ढीलवाई, समय पर सफाई नहीं होना, शहर की बड़े नाले का जाम होना, वार्डों का पानी डाइवर्ट करने और सड़क किनारे नाले के ऊपर लोगों का अतिक्रमण इसमें मुख्य कारण हैं। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अधिक बारिश होने से ये स्थिती बनी। इसके साथ साथ लोगों को नाले में कूड़ा डालने वाली आदत को छोड़ना पड़ेगा। देखिए कुछ तस्वीरें… शनिवार सुबह शहर के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिनमें कहीं बाइक पानी में डूबी दिखी तो कहीं ई-रिक्शा पलट गए। कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों में पानी घुस गया। कई वार्डों में लोगों के घरों में इतना पानी भर गया कि सुबह खाना तक नहीं बन सका। लोग बोले निगम को उठानी पड़ेगी जिम्मेदारी लोगों का कहना है कि हर साल जिन जगहों पर जलभराव होता है, उन स्थानों की जानकारी नगर निगम को पहले से रहती है, लेकिन समय रहते स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती। इसी कारण हर बारिश में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। नगर निगम को अपनी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। वरना हालत इससे भी खराब होगा। मेयर बोले- जल्द निकालेंगे समाधान इस पूरे मामले पर दैनिक भास्कर से बातचीत में गोरखपुर के मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि कुछ दिन पहले विजय चौक और धर्मशाला क्षेत्र का निरीक्षण किया गया था, जिसका असर इस बारिश में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि पहले वहां नाली का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर आ जाता था, लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं बनी। उन्होंने कहा, “अभी कुछ दिन पहले विजय चौक और धर्मशाला पर हम लोगों ने निरीक्षण किया था, इसका फायदा हम लोगों को मिला है। पहले नाली का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर आ गया था, लेकिन इस वाली बारिश में यह स्थिति नहीं बनी है। धर्मशाला से लेकर डोमिनगढ़ तक नाले की सफाई व उसकी मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा, जिसकी वजह से पानी का फ्लो ठीक ढंग से निकल सकेगा। गोरखपुर में चारों तरफ सड़क और नाली का निर्माण हो रहा है, जिसकी वजह से वार्ड के अंदर भी जलभराव की स्थिति देखने को मिली। इसके अलावा सड़क के किनारे लोगों ने नाले के ऊपर अतिक्रमण कर लिया है, जिसका असर जलभराव में देखने को मिलता है।” अखिलेश यादव के तंज पर मेयर ने कहा, “हम लगातार काम कर रहे हैं। तंज कसने वाले करते रहेंगे। जनता को पता है कि उनकी सरकार में क्या-क्या होता था, यह किसी से छिपा नहीं है।” नगर आयुक्त ने तैयार किया रोडमैप रिकॉर्ड बारिश के बाद नगर आयुक्त ने जलभराव से निपटने के लिए रोडमैप तैयार किया है। सभी जोनल अधिकारियों, सफाई निरीक्षकों और अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। नालों की नियमित सफाई कराने, सभी पंपिंग स्टेशन, संपवेल और अस्थायी पंपों को 24 घंटे चालू रखने तथा जलनिकासी व्यवस्था पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। संवेदनशील इलाकों में स्थायी जलनिकासी व्यवस्था विकसित करने के लिए संबंधित विभागों से संयुक्त एक्शन प्लान तैयार कराया जा रहा है। वहीं निर्माणाधीन नालों का काम तय समय में पूरा करने, रात को क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को सक्रिय रखने और 24×7 कंट्रोल रूम के जरिए शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम ने लोगों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम के नंबर 1533, 8810709390 और 0551-2342621 जारी किए हैं। जलभराव की स्थिति में लोग इन नंबरों पर सूचना देकर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकते हैं। 110.2 मिमी बारिश से शहर की रफ्तार थमी गोरखपुर में शनिवार सुबह तक करीब 110.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। कई सड़कों पर कई फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। ऑफिस, स्कूल, कॉलेज और जरूरी काम के लिए निकले लोगों को जगह-जगह जलभराव और जाम का सामना करना पड़ा। कई जगह सड़कें छोटे-छोटे तालाब जैसी दिखाई दीं। इन इलाकों में सबसे ज्यादा जलभराव बारिश के बाद वार्ड 48 धर्मशाला बाजार, वार्ड 52 विजय चौक, वार्ड 26 बेतियाहाता, वार्ड 71 आर्य नगर, वार्ड 79 सिविल लाइंस-1, वार्ड 72 सिविल लाइंस-2, टाउन हॉल, जिला अस्पताल रोड, गांधी गली, राप्ती कॉम्प्लेक्स, सीएमओ कार्यालय परिसर, अलीनगर, असुरन, मोहद्दीपुर समेत कई निचले इलाकों में पानी भर गया। कई जगह घंटों तक पानी जमा रहा, जिससे लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कत हुई और दुकानों का कारोबार प्रभावित हुआ। बेतियाहाता, रुस्तमपुर, बिलंदपुर, दाउदपुर, कालेपूर, रायगंज, तुर्कमानपुर एवं माया बाजार सहित 10 वार्डों का पानी जिस नाले के जरिए ताल में जाता है, उसके आखिरी छोर पर जाली लगी थी। जाली रामगढ़ताल में प्लास्टिक एवं अन्य ठोस गंदगी गिरने से रोकने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने लगवाया था। जाली पर यह गंदगी जमी थी, जिससे बहाव धीमा हो गया था। पार्षद ने जाली को खोलवाने के लिए दबाव बनाया, जिसके बाद जाली खुली और तेजी से बहाव शुरू हो गया। इस दौरान गोरखपुर के जिला अस्पताल के OPD में भी पानी लग गया। मरीज बेंच के ऊपर पैर उठाकर बैठे हुए नजर आएं। अगले कुछ दिन और सतर्क रहने की जरूरत दैनिक भास्कर से बातचीत में मौसम वैज्ञानिक डॉ. कैलाश पाण्डेय ने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। रुक-रुक कर मध्यम से तेज बारिश होगी और कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। ऐसे में यदि जलनिकासी व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है। एक तरफ अच्छी बारिश किसानों के लिए राहत और बेहतर फसल की उम्मीद लेकर आई है, वहीं दूसरी तरफ शहर के लोगों के लिए हर बारिश के साथ जलभराव सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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जानिए गोरखपुर में क्यों लगा इतना पानी:मेयर और नगर आयुक्त ने बताया मास्टर प्लान, लोग बोले- अब उठानी पड़ेगी जिम्मेदारी