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प्रयागराज में शनिवार को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर एक बार फिर सरकारी तंत्र की सुस्ती और आमजन की बदहाली का कड़वा सच लेकर सामने आया है। जनपद की पांच तहसीलों सदर, सोरांव, बारा, फूलपुर और कोरांव में एक दिन में लोगों ने 2,084 शिकायतें दर्ज कराई। इसमें से अधिकतर राजस्व और पुलिस विभाग की है। इन विभागों में सैकड़ों सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद शिकायतों का यह पहाड़ केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर तमाचा है। लोगों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए महीने के पहले और तीसरे शनिवार को ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ आयोजित किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि हर बार शिकायतों की संख्या घटने के बजाय बढ़ती जा रही है। यह महज अधिकारियों की ‘बेबसी’ नहीं, बल्कि उनकी कार्यप्रणाली में व्याप्त घोर लापरवाही और उदासीनता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। रस्म अदायगी बनाम जनहित
प्रशासन ने हंडिया और फूलपुर में कुछ लेखपालों को प्रतिकूल प्रविष्टि देकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने का दिखावा किया है, लेकिन क्या महज एक ‘प्रविष्टि’ से व्यवस्था का यह सड़ांध कम हो जाएगा? जब तंत्र का पूरा अमला तहसील में मौजूद हो और निस्तारण दर 2 प्रतिशत से भी कम हो, तो यह स्पष्ट है कि अधिकांश कर्मचारी और अधिकारी जनहित के मामलों में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। समाधान दिवस अब एक रस्म अदायगी बनकर रह गया है। फाइलों के ढेर में दम तोड़ रही जनता की ये 2,084 शिकायतें चीख-चीख कर कह रही हैं कि प्रशासन समाधान नहीं, केवल तारीखें देने का काम कर रहा है। शिकायतों का सबसे बड़ा केंद्र राजस्व विभाग आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे अधिक चोट राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर पड़ रही है। इन पांच तहसीलों में कुल 2,084 शिकायतों में से अकेले 1,163 शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित हैं। कोरांव की 235, सदर की 80, सोरांव की 405, बारा की 148 और फूलपुर की 295 राजस्व संबंधी शिकायतें यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि जमीन के विवाद, पैमाइश, अवैध कब्जा के मामले हल नहीं किए जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस की 324 शिकायतें और विकास की अव्यवस्था लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। कोरांव की स्थिति भयावह कोरांव की रिपोर्ट ने तो हद पार कर दी। वहां एक दिन में 642 शिकायतें दर्ज हुईं। पुलिस की 80, विकास विभाग की 65, बिजली की 11 और आपूर्ति की 15 शिकायतें आई। शिकायतों का अंबार यह बताने के लिए काफी है कि जनहित के प्रति जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है।
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प्रयागराज की पांच तहसीलों से एक दिन में 2084 शिकायतें:समाधान के नाम पर खानापूर्ति, दो प्रतिशत मामलों का किया निस्तारण