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लखनऊ के डालीगंज निवासी युवक को फेसबुक पर ब्रिटेन की महिला बनकर प्रेमजाल में फंसाने और कस्टम-इनकम टैक्स के नाम पर 68 लाख रुपए की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय नाइजीरियन गिरोह के एक सदस्य को एसटीएफ ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद हुई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 10 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। आरोपी साइबर ठगी के साथ ड्रग्स तस्करी में भी शामिल था। डालीगंज के युवक की शिकायत से खुला पूरा नेटवर्क एसटीएफ के अनुसार डालीगंज निवासी युवक की फेसबुक पर “डोरिस विलियम” नाम की प्रोफाइल से दोस्ती हुई। प्रोफाइल संचालित करने वाले गिरोह ने खुद को ब्रिटेन की महिला बताया और धीरे-धीरे युवक को प्रेमजाल में फंसा लिया। इसके बाद महंगे गिफ्ट, डॉलर और पाउंड भेजने का झांसा दिया गया।
कुछ दिन बाद गिरोह के सदस्य खुद को कस्टम अधिकारी, इनकम टैक्स अधिकारी और जीएसटी अधिकारी बताकर संपर्क करने लगे। उन्होंने पार्सल छुड़ाने और टैक्स जमा कराने के नाम पर किश्तों में करीब 68 लाख रुपए ठग लिए। पीड़ित ने बाद में मदेयगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
पहले एक आरोपी पकड़ा गया, अब मुख्य साथी भी गिरफ्तार मामले की जांच के दौरान एसटीएफ ने 15 मई 2026 को नाइजीरियाई नागरिक उचेनवा (UCHENWA) को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। पूछताछ और तकनीकी जांच में उसके साथी ओबासे प्रॉस्पर (OBASE PROSPER) का नाम सामने आया, जो फरार चल रहा था। दिल्ली में एनसीबी के साथ संयुक्त कार्रवाई एसटीएफ साइबर टीम आरोपी की तलाश में दिल्ली पहुंची। इस दौरान सूचना मिली कि ओबासे प्रॉस्पर साइबर ठगी के साथ मादक पदार्थों की तस्करी भी करता है। इसके बाद एनसीबी दिल्ली जोनल यूनिट के साथ संयुक्त छापेमारी की गई। कार्रवाई में आरोपी के कब्जे से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन, पांच मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट बरामद किए गए। जब्त मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 10 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है। मेडिकल वीजा पर आया, फिर अवैध रूप से रहने लगा पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह वर्ष 2023 में मेडिकल वीजा पर भारत आया था। वीजा समाप्त होने के बाद भी वह दिल्ली में अवैध रूप से रह रहा था। यहीं उसकी मुलाकात अन्य नाइजीरियाई नागरिकों से हुई और वह सोशल मीडिया के जरिए साइबर ठगी तथा ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क से जुड़ गया। ऐसे चलाता था अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड एसटीएफ के मुताबिक गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाता था। इसके बाद भारतीय युवक-युवतियों से दोस्ती कर उन्हें प्रेमजाल में फंसाया जाता था। महंगे गिफ्ट और विदेशी मुद्रा भेजने का झांसा देकर बाद में कस्टम, इनकम टैक्स और एयरपोर्ट अधिकारियों के नाम पर लाखों रुपए वसूले जाते थे। कई राज्यों में फैला है गिरोह जांच में सामने आया है कि गिरोह ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में इसी तरह लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। एसटीएफ बरामद मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराएगी। साथ ही बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
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लखनऊ में 68 लाख की ठगी करने वाला नाइजीरियन गिरफ्तार:युवक को फेसबुक पर UK महिला बनकर फंसाया, दिल्ली से 10 करोड़ की ड्रग्स भी बरामद