चंदौली में मुहर्रम मजलिस, मौलाना जाफर रिजवी ने किया खिताब:करबला की दास्तान को बताया परिवार, समाज के लिए आदर्श


चंदौली जिला मुख्यालय पर मुहर्रम के अवसर पर एक मजलिस का आयोजन किया गया। इस दौरान खिताब करते हुए मौलाना जाफर रिजवी ने कहा कि करबला की दास्तान को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसमें परिवार, समाज और व्यक्ति के लिए कई आदर्श घटनाएं शामिल हैं। मौलाना ने अपने संबोधन में इमाम हुसैन और उनकी बहन जनाबे ज़ैनब के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि जनाबे ज़ैनब न होतीं, तो करबला की कहानी दुनिया तक अपने वास्तविक रूप में नहीं पहुंच पाती। इमाम हुसैन की शहादत के बाद, उन्होंने अत्याचारी बादशाह यज़ीद के दरबार में निर्भीक होकर प्रतिरोध किया। जनाबे ज़ैनब ने दुनिया को यह संदेश दिया कि इस्लाम का असली संदेश न्याय, सत्य और मानवता है। मौलाना रिजवी ने कहा कि जनाबे ज़ैनब ने अपने धैर्य, साहस और अदम्य हौसले से यह साबित किया कि सच्चाई को कभी दबाया नहीं जा सकता। करबला की दास्तान आज भी उन सभी को शक्ति देती है जो अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं। मौलाना जाफर रिजवी ने इमाम हुसैन के मित्र हज़रत हबीब इब्ने मज़ाहिर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करबला की जंग रिश्तों और वफादारी की सबसे बड़ी मिसाल है। इमाम के सच्चे साथियों ने दीन और इंसानियत की रक्षा के लिए न केवल अपनी जान, बल्कि अपने जवान बेटों तक का बलिदान दिया। यही कारण है कि करबला का संदेश सदियों बाद भी लोगों के दिलों में जीवित है। इस मजलिस में वाराणसी से आई अंजुमन सज्जादिया पठानी टोला, बनारस के अलावा अंजुमन अब्बासिया मक़दूमाबाद, लौंदा और सिकंदरपुर की अंजुमनों के मातमी दस्तों ने नौहाख्वानी और मातम के जरिए इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की। मातमी धुनों और “या हुसैन” की सदाओं से पूरा माहौल गमगीन और आध्यात्मिक हो उठा। इस अवसर पर मायल चंदौलवी, वकार सुल्तानपुरी, शहंशाह मिर्जापुरी, मोनिस, हाजी नूरूल और सिब्बल साहब सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

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