गोरखपुर में दाह संस्कार कराने गए 2 वकीलों की मौत:घाट का छज्जा गिरने से टूटी थी सिर की हड्डियां; फोन पर बेटियां बोलीं- पापा मैं आ रहीं हूं


गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे राजघाट पर दाह संस्कार कराने गए 2 वकील आलोक अस्थाना (45) और संजय सिंह (42) की मौत हो गई। रविवार सुबह करीब 11:30 बजे राप्ती नदी के घाट पर गुंबदनुमा छज्जा भरभराकर गिर गया। इसके नीचे बैठे दो वकीलों की मौत हो गई। आसपास के लोगों ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। इस घटना में इनकी गर्दन की हड्डी बुरी तरह से टूट कर चकनाचूर हो गई। जिसकी पुष्टि शव के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से हुई है। संजय सिंह के घायल होने की सूचना लखनऊ में पढ़ाई कर रही उनकी दोनों बेटियों को दी गई, तो दोनों ने अपने पापा से बात करने की इच्छा जताई। लोगों ने बात कराया तो बात करते हुए दोनों बेटियां अपनी पापा की आवाज सुनकर फफक कर रो पड़ीं। दोनों ने कहा कि- पापा आप ठीक हो जाएंगे, हमलोग आ रहे हैं। जिसके बाद से अस्पताल में संजय सिंह के साथ मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। एक तरफ घटना के 30 मिनट बाद आलोक अस्थाना ने दम तोड़ दिया था। वहीं अस्पताल में भर्ती जिंदगी-मौत से लड़ रहे संजय सिंह भी घटना के तकरीबन 9 घंटे के बाद इस दुनिया से चले गए। इस घटना के बाद से दोनों परिवार में चीख पुकार मच गया। परिवार के लोग और कुछ अधिवक्ता साथी अस्पताल पहुंचे शोक संवेदना व्यक्त की। देर रात तक मेडिकल कॉलेज पुलिस चौकी पर भी लोगों का आना जाना लगा रहा। देर रात मृतक संजय सिंह के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। अब विस्तार से पढिए पूरा मामला दाह संस्कार कराने गए थे दोनों वकील यह घटना रविवार सुबह करीब 11:30 बजे की है। जब राप्ती नदी किनारे विनोद तिवारी की माता का अंतिम संस्कार होने वाला था। इसी में ढ़ेर सारे वकील शामिल होने पहुंचे थे। जिसमें आलोक अस्थाना (45) और संजय सिंह (42) भी पहुंचे। श्मशान घाट पर ये दोनों लोग जल्दी पहुँच गए थे। राप्ती नदी के किनारे गुरु गोरक्षनाथ घाट पर बैठने और आराम करने के लिए ऊंचे ऊंचे चबूतरे बनाए गए हैं। जिसके ऊपर गुंबदनुमा छज्जा भी बनाया गया है। वहीं ये दोनों बैठ गए। लोगों का कहना था कि अचानक से मौसम बदलने लगा और फिर बारिश शुरू हो गई। वहां चश्मदीदों का कहना था कि उस गुंबदनुमा छज्जा के नीचे ये दोनों वकील थे। तभी अचानक कुछ गिरने की आवाज आई तो लोग भागकर सब पहुंचे। तो वहां दोनों लोग उस छज्जे के मलबे में दबे हुए थे। आसपास के लोगों ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। आरोप है कि एंबुलेंस आने में हुई देरी कुछ लोगों ने एंबुलेंस को कॉल करना शुरू किया। लोगों का आरोप है कि एम्बुलेंस को वहाँ आने में काफी देर हुई तब तक जमीन पर दोनों लोग तड़पते रहे। अन्त में स्थानीय लोगों और पुलिस ने दोनों घायलों को ई रिक्शा और मैजिक गाड़ी से जिला अस्पताल इलाज के लिए लेकर आए। यहां आलोक अस्थाना की हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। 4 घंटे तक जिला अस्पताल में हुआ हंगामा इसके बाद से दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए भी एंबुलेंस आने में देरी हुई। थोड़ी देर बाद एंबुलेंस आई तो परिजनों ने उन्हें शिफ्ट करके दूसरे अस्पताल ले जाने लगे। लेकिन रास्ते में आलोक अस्थाना की मौत हो गई। इसके बाद एंबुलेंस से शव जिला अस्पताल लाया गया। जिसके बाद से वकीलों ने जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि अस्पताल की लापरवाही की वजह से वकील साथी की जान गई है। गुस्साए वकीलों ने एंबुलेंस में भी तोड़फोड़ की। एसपी सिटी, सीओ और कई थानों की पुलिस मौजूदगी में वकील करीब 4 घंटे तक हंगामा करते रहे। ये पूरा घटनाक्रम करीब 4 घंटे तक चलता रहा। जबकि दूसरे वकील संजय सिंह ने देर रात मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ा। CMO, जेई और ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज वकील की पत्नी की शिकायत पर सीएमओ राजेश झा और जिला अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद वकील शांत हुए। पत्नी ने बताया- सीएमओ को फोन किया तो उन्होंने कहा कि रोज यहां 10 लोग मरते, एक और मर जाएगा तो क्या हो जाएगा? वहीं डीएम दीपक मीणा ने तत्कालीन जेई और ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। दोनों वकीलों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता राशि प्रदान कर दी गई है। जबकि 5-5 लाख की सहायता के लिए शासन को लिखा गया है। हादसा जिला मुख्यालय से करीब 4 किलोमीटर दूर राप्ती नदी किनारे बने गोरक्षनाथ घाट पर हुआ। यहां अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने के लिए 8 से अधिक चबूतरे बनाए गए हैं। इन चबूतरों पर गुंबदनुमा छज्जे भी बने हैं। देखिए तस्वीरें… सरल स्वभाव के थे संजय सिंह गोरखपुर के शक्तिनगर कॉलोनी में रहने वाले संजय सिंह पिछले 28 सालों से दीवानी कचहरी में वकालत करते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां, माता-पिता और दो भाई हैं। उनकी पत्नी का नाम अर्चना सिंह है। उनकी दोनों बेटियां, उर्वर्षी सिंह (21) आंशिका सिंह(18) लखनऊ में रहकर बीबीए की पढ़ाई करती हैं। मृतक संजय सिंह के वकील साथियों ने बताया कि वो काफी सरल स्वभाव के थे। टाइम पे अपना काम पूरा करना उनकी आदत में था। अपने बच्चों को ऊंचाईयों पर जाते देखना चाहते थे। बेटे को इंजीनियर और बेटी को एक अधिकारी बनाने का सपना राप्तीनगर में रहने वाले वकील आलोक अस्थाना (45) मूल रूप से कुशीनगर के सन्थू गांव के निवासी थे। वह करीब 20 साल से दीवानी कचहरी में प्रैक्टिस कर रहे थे। परिवार में पत्नी शालिनी, बेटा आदित्य, बेटी सिद्धि और छोटा भाई है। उनका बेटा आदित्य पंजाब में एनआईटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी सिद्धि ग्रेजुएशन के प्रथम वर्ष में है। छोटा भाई बस्ती में रहकर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) के तौर पर काम करता है। आलोक अस्थाना अपने बेटे को इंजीनियर और बेटी को अधिकारी बनाना चाहते थे। पत्नी बोली- डॉक्टरों की लापरवाही से जान गई पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में आलोक की पत्नी शालिनी अस्थाना ने लिखा- मेरे पति रविवार को अपने साथी वकील संजय सिंह के साथ एक दाह संस्कार में गए थे। राजघाट स्थित चबूतरे पर दोनों बैठे थे। तभी अचानक छज्जा गिरने से मेरे पति आलोक अस्थाना और संजय सिंह को गंभीर चोटें आईं। दोनों को वहां से जिला अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने उनका कोई इलाज नहीं किया। सीएमओ से कई बार संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि यहां रोज 10 लोग मरते हैं। एक और मर जाएगा, तो क्या हो जाएगा। जिला अस्पताल के सीएमओ और डॉक्टरों ने जानबूझकर दवा-इलाज नहीं किया, जिससे पति की मौत हो गई। शलिनी की शिकायत पर सीएमओ राजेश झा और अस्पताल कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। डीएम बोले- आकाशीय बिजली गिरने की आशंका डीएम दीपक मीणा ने बताया- राजघाट पर एक परिवार दाह संस्कार के लिए आया था। इसी दौरान अधिवक्ता आलोक अस्थाना और संजय सिंह गुंबदनुमा बैठने वाले स्थान पर बैठे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आकाशीय बिजली गिरने से वहां तेज झटका लगा। इससे स्लैब गिर गया और दोनों अधिवक्ता घायल हो गए। आलोक अस्थाना गंभीर रूप से घायल हुए थे, जबकि संजय सिंह को भी चोटें आई हैं। इलाज के दौरान आलोक अस्थाना और संजय सिंह की मौत हो गई। स्थानीय लोगों और परिजनों ने एंबुलेंस के पहुंचने में देरी की शिकायत की है। एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम की जांच कराई जा रही है। 2021 में मुख्यमंत्री ने किया था घाट का लोकार्पण जिस गुंबद के गिरने से हादसा हुआ, उसका निर्माण सिंचाई विभाग ने कराया था। गुरु गोरक्षनाथ घाट का लोकार्पण 16 फरवरी, 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। घाट के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। यही वजह बताई जाती है कि नगर निगम ने अब तक घाट का हैंडओवर नहीं लिया है। हालांकि, नगर निगम की ओर से यहां सफाई का काम कराया जाता है। 27.85 करोड़ से हुआ था घाट का सुंदरीकरण गुरु गोरक्षनाथ घाट के सुंदरीकरण का प्रस्ताव साल- 2019 में तैयार किया गया था। करीब 27 करोड़ 85 लाख 71 हजार रुपए की लागत से घाट का सुंदरीकरण कराया गया। राप्ती नदी के दूसरी ओर रामघाट का निर्माण भी करीब 21 करोड़ रुपए की लागत से कराया गया है। गुरु गोरक्षनाथ घाट पर अंत्येष्टि में आने वाले लोगों के बैठने के लिए जगह-जगह गुंबदनुमा छत वाले चबूतरे बनाए गए थे। रविवार को इनमें से एक गुंबद गिर गया और उसके नीचे दोनों अधिवक्ता दब गए। बता दें, गुरु गोरक्षनाथ घाट पर कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। सांसद रवि किशन की फिल्म ‘महादेव का गोरखपुर’ की शूटिंग भी इसी घाट पर हुई थी। इसके अलावा अन्य फिल्मों की शूटिंग के लिए भी घाट का इस्तेमाल किया गया है।

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