कौशांबी में नकली यूरिया फैक्ट्री पर छापा:100 बाल्टी तरल यूरिया और 70 बोरी इफको यूरिया बरामद, जांच जारी


कौशांबी के चरवा थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम एक नकली यूरिया फैक्ट्री पर छापेमारी कर भारी मात्रा में तरल यूरिया, इफको यूरिया की बोरियां, नकली स्टीकर और अन्य सामग्री बरामद की गई। चरवा थाना क्षेत्र के पंसौर गांव में मंगलवार शाम EIPR के इन्वेस्टिगेटर ऑफिसर पीयूष श्रीवास्तव और देवेंद्र प्रताप सिंह की टीम ने कथित नकली यूरिया फैक्ट्री पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान लगभग 100 बाल्टी कथित नकली डीएफएफ तरल यूरिया और एक पिकअप वाहन में लदी करीब 70 बोरी इफको यूरिया बरामद की गई। छापेमारी में टीम को बड़ी मात्रा में नकली स्टीकर, टाटा गल्फ और एचपी ब्रांड की खाली बाल्टियां, तरल यूरिया तैयार करने में प्रयुक्त कच्चा माल तथा खाद की खाली बोरियां भी मिलीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह इकाई पिछले करीब दो वर्षों से संचालित होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि यह फर्म सल्लाहपुर, थाना पुरामुफ्ती निवासी राम सूरत के पुत्र अजय कुमार द्वारा संचालित की जा रही थी। हालांकि, छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में मौजूद संचालक और कर्मचारी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलने पर सीओ चायल शिवांक सिंह, चरवा और कोखराज थाना पुलिस, जिला कृषि अधिकारी शिव शंकर चौधरी तथा जीएसटी विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जिला कृषि अधिकारी शिव शंकर चौधरी ने बताया कि किसानों को सब्सिडी पर मिलने वाली यूरिया का कथित तौर पर तरल यूरिया बनाकर बीएस-6 वाहनों में उपयोग के लिए बेचा जा रहा था। उन्होंने कहा कि इस तरह का उपयोग किसानों के हितों के साथ-साथ वाहनों के इंजन के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने बताया कि बरामद सामग्री को जब्त कर आवश्यक लिखापढ़ी की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट जिलाधिकारी कौशांबी को भेजी गई है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद संबंधित फैक्ट्री संचालक के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि इतनी बड़ी मात्रा में सब्सिडी वाली इफको यूरिया कहां से प्राप्त की गई। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि संबंधित यूरिया किस सहकारी समिति से खरीदी गई थी। अधिकारियों के अनुसार, सामान्यतः किसानों को यूरिया लेने के लिए आधार कार्ड, किसान आईडी और भूमि संबंधी अभिलेख प्रस्तुत करने होते हैं। इस पहलू की भी विस्तृत जांच की जा रही है।

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