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गोंडा। कैसरगंज से भाजपा सांसद करण भूषण सिंह की मेसर्स नंदिनी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े खनन मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वर्ष 2019 में गोंडा जिला प्रशासन की ओर से लगाए गए 4.88 करोड़ रुपए के जुर्माने और देनदारी से संबंधित तीन प्रशासनिक आदेश निरस्त कर दिए हैं। हालांकि, कोर्ट ने अवैध खनन के आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मामला गोंडा के तरबगंज क्षेत्र के दुर्गागंज गांव में बालू खनन के पट्टे से जुड़ा है। जनवरी 2018 में गाटा संख्या 2769 की करीब 24 हेक्टेयर जमीन पर फर्म को बालू खनन का पट्टा मिला था। इसकी लीज डीड मई 2018 में निष्पादित हुई थी। नदी कटान को लेकर ग्रामीणों के विरोध के बाद जनवरी 2019 में खनन विभाग ने जांच की। जांच टीम ने स्वीकृत क्षेत्र से बाहर करीब 1.22 लाख घनमीटर अवैध खनन किए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, लेखपाल की रिपोर्ट में खनन स्वीकृत क्षेत्र के भीतर बताया गया था। डीएम के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची थी फर्म 15 जून 2019 को तत्कालीन डीएम गोंडा ने यूपी उप खनिज नियमावली 1963 के नियम-57 के तहत 10 लाख रुपए की पेनाल्टी, रॉयल्टी और खनिज मूल्य समेत कुल 4,88,83,810 रुपए की वसूली का आदेश दिया था। इसके बाद फर्म की ओर से कमिश्नर और विशेष सचिव के समक्ष अपील की गई, लेकिन दोनों स्तरों पर राहत नहीं मिली। इसके बाद फर्म ने हाईकोर्ट का रुख किया। डीएम के अधिकार क्षेत्र पर उठाया गया सवाल याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि उप खनिज नियमावली के नियम 74(2) के तहत संबंधित अपराध की सुनवाई प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है। कार्यपालक अधिकारी के तौर पर डीएम को सीधे जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं था। कोर्ट ने तीनों प्रशासनिक आदेश किए निरस्त जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी और जस्टिस शेखर बी. सराफ की खंडपीठ ने 19 अगस्त को फैसला सुनाया। कोर्ट ने डीएम गोंडा, कमिश्नर देवीपाटन मंडल और विशेष सचिव के उन तीनों आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके जरिए फर्म पर देनदारी तय की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि फैसला प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र की खामी के आधार पर दिया गया है। कोर्ट ने अवैध खनन हुआ था या नहीं, इस मुद्दे के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सक्षम अदालत में कार्रवाई का रास्ता खुला फैसले के अनुसार प्रशासन सक्षम न्यायिक अदालत के माध्यम से नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है। हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी 21 अगस्त की देर शाम करीब 8 बजे अपलोड की गई। फैसले के बाद सांसद करण भूषण सिंह ने कहा कि उन पर गलत आरोप लगाए गए थे और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला है।
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कैसरगंज सांसद की फर्म से जुड़े खनन-केस में फैसला:अवैध बालू खनन को लेकर लगा 4.88 करोड़ की वसूली वाले 3 प्रशासनिक आदेश रद्द