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प्रयागराज मंडल में विकास परियोजनाओं की धीमी गति पर कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मंडल के चारों जनपदों में चल रहे निर्माण कार्यों की वित्तीय और भौतिक प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कार्यदायी संस्थाओं को कड़ी फटकार लगाई। कमिश्नर ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में कार्यों में तेजी नहीं आई, तो दोषी अधिकारियों और संस्थाओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। समीक्षा बैठक का मुख्य फोकस मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज की 181.60 करोड़ रुपये की 17 परियोजनाएं थीं। मंडलायुक्त ने उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल), यूपी सिडको और राष्ट्रीय निर्माण निगम को इन कार्यों में देरी के लिए फटकार लगाई। प्रतापगढ़ में राजकीय निर्माण निगम द्वारा बनाए जा रहे तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और मेडिकल कॉलेज परिसर में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के निर्माण में भी अत्यधिक सुस्ती पाई गई। इसके अलावा, यूजी सीटों (50) और पीजी सीटों (49) की वृद्धि के लिए निर्माणाधीन भवनों तथा कार्डियोलॉजी विभाग के द्वितीय तल के निर्माण में भी विलंब पर कमिश्नर ने कड़ी आपत्ति जताई। राज्य सेतु निगम के 1710.90 करोड़ रुपये की लागत वाले 18 निर्माण कार्यों की समीक्षा में औसत वित्तीय प्रगति मात्र 61 प्रतिशत पाई गई। मंडलायुक्त ने इस पर भी सवाल उठाए। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कुल 248 परियोजनाओं में से 65 लंबित मिलीं। इनमें प्रतापगढ़ की 33, प्रयागराज की 16, कौशांबी की 14 और फतेहपुर की 2 परियोजनाएं शामिल हैं। प्रयागराज के निर्माण खंड-3 के कार्यों को लेकर मंडलायुक्त ने विशेष नाराजगी व्यक्त की। इस खंड द्वारा एनएच-30 पर स्वागत द्वार, प्रयागराज-लालापुर-इमलिया-कंजासा-भीटी मार्ग पर क्षतिग्रस्त पुलिया के स्थान पर आरसीसी बॉक्स कलवर्ट निर्माण और वरुणा नदी पर लघु सेतु व पहुंच मार्ग के निर्माण में भारी विलंब पाया गया। कमिश्नर ने मुख्य अभियंता को इन सभी लंबित कार्यों की व्यक्तिगत स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। एनओसी और तकनीकी स्वीकृतियों पर जोर
ईपीसी मॉडल के तहत निर्माणाधीन बहुमंजिला भवन, प्रयाग विधि विश्वविद्यालय के प्रस्तावित 12 भवन, क्लाइव रोड पर न्यायिक आवास और लीडर रोड की आवासीय परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मंडलायुक्त ने सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी), फायर एनओसी और तकनीकी स्वीकृतियां समय रहते प्राप्त कर ली जाएं ताकि कार्यों में अवरोध न आए। साथ ही, अवस्थापना निधि के तहत चल रही 18 परियोजनाओं की मात्र 33 प्रतिशत भौतिक प्रगति पर भी उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। अगस्त से अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य
मंडलायुक्त ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया कि अधिकांश निर्माणाधीन परियोजनाओं को अगस्त से अक्टूबर 2026 के मध्य पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की भूमि संबंधी या प्रशासनिक बाधा आने पर संबंधित जिलाधिकारी के माध्यम से उनका तत्काल निस्तारण कराया जाए। नवनिर्मित सड़कों के किनारे ट्री-गार्ड के साथ व्यापक वृक्षारोपण और वैज्ञानिक तरीके से हरित पट्टियों का विकास एवं पर्यावरणीय सौंदर्यीकरण किया जाए।
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कमिश्नर ने विकास परियोजनाओं की सुस्ती पर जताई नाराजगी:कार्यदायी संस्थाओं को अगस्त-अक्टूबर तक काम पूरा करने की चेतावनी