लखनऊ में 'माय फर्स्ट एनकाउंटर' नाटक का मंचन:पुलिस, अपराध और नैतिक द्वंद्व की कहानी ने छोड़ी गहरी छाप


लखनऊ के रंगमंच प्रेमियों के लिए गुरुवार की शाम खास बन गई, जब गोमतीनगर स्थित अंबेडकर सभागार में चर्चित नाटक ‘माय फर्स्ट एनकाउंटर’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। सफर फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांच, संवेदना और सामाजिक सरोकारों से भरपूर कहानी के माध्यम से अंत तक बांधे रखा। नाटक के लेखक और निर्देशक मोहम्मद अनवर बेग ने पुलिस व्यवस्था, अपराध और समाज के बीच मौजूद जटिल रिश्तों को बेहद संवेदनशीलता के साथ मंच पर उतारा। कहानी एक ऐसे पुलिस इंस्पेक्टर के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका पहला एनकाउंटर उसके जीवन की दिशा बदल देता है। इस घटना के बाद उसके सामने नैतिकता, कर्तव्य और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े कई सवाल खड़े हो जाते हैं। नागरिकों की अपेक्षाओं को करीब से महसूस किया मंचन के दौरान दर्शकों ने पुलिस अधिकारियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव, प्रशासनिक चुनौतियों और आम नागरिकों की अपेक्षाओं को करीब से महसूस किया। नाटक यह संदेश देने में सफल रहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिए गए हर निर्णय का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करता है। कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति के सहयोग से किया गया। प्रस्तुति के दौरान सभागार में मौजूद दर्शक कई दृश्यों पर भावुक भी नजर आए, जबकि कुछ संवादों ने उन्हें आत्ममंथन करने के लिए मजबूर कर दिया। कलाकारों के दमदार अभिनय ने कहानी को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। कलाकारों ने शानदार अभिनय किया नाटक में आलोक कुमार पाण्डेय, अचल बोस, प्रभात कुमार, राम यादव, संजीव प्रजापति, करण यादव सहित अन्य कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। वहीं मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और संगीत संयोजन ने प्रस्तुति को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजकों का कहना है कि यह नाटक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास है।

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