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मेरठ के बहुचर्चित कपसाड़ कांड में हत्या और अपहरण के आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई बुधवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच जाएगी। स्पेशल पोक्सो कोर्ट कल यानी बुधवार को उस क्रिमिनल अपील पर फैसला सुनाएगी, जिसमें जेजे बोर्ड द्वारा पारस सोम को बालिग घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई है। अदालत का फैसला न केवल इस चर्चित मामले की सुनवाई की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि आरोपी का ट्रायल सामान्य अदालत में चलेगा या किशोर न्याय कानून के दायरे में। कपसाड़ गांव में आठ जनवरी को दलित महिला सुनीता जाटव की हत्या और उसकी बेटी रूबी के अपहरण की वारदात ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। घटना के बाद गांव में भारी तनाव फैल गया था। हालात इतने संवेदनशील हो गए थे कि गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर देना पड़ा। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और मीडिया की गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी गई थी। करीब 48 घंटे बाद पुलिस ने रूबी को सकुशल बरामद कर आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिसके बाद स्थिति सामान्य होने लगी थी। नाबालिग का दावा बना कानूनी लड़ाई का आधार
मामले में नया मोड़ 14 जनवरी को आया, जब आरोपी पक्ष के अधिवक्ता बलराम सोम ने अदालत में याचिका दाखिल कर दावा किया कि घटना के समय पारस सोम नाबालिग था। उन्होंने मामले की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में कराए जाने की मांग की। एससी-एसटी कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित अभिलेख तलब किए और नौ फरवरी को मामला किशोर न्याय बोर्ड को स्थानांतरित कर दिया। ओसिफिकेशन टेस्ट से बालिग घोषित
वादी पक्ष ने शुरू से ही इस दावे का विरोध किया और आरोपी को बालिग बताते हुए कार्रवाई की मांग की। दोनों पक्षों के बीच कई महीनों तक चली सुनवाई के बाद किशोर न्याय बोर्ड ने सात मई को आरोपी का ओसिफिकेशन टेस्ट कराए जाने के आदेश दिए। 12 मई को मेडिकल परीक्षण कराया गया और आठ जून को आई रिपोर्ट के आधार पर जेजे बोर्ड ने पारस सोम को बालिग घोषित कर दिया। जेजे बोर्ड के आदेश को दी गई चुनौती
जेजे बोर्ड के फैसले से असहमत पारस सोम पक्ष ने स्पेशल पोक्सो कोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल कर दी। अपील में जेजे बोर्ड के आदेश को गलत बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने जेजे बोर्ड से ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड (टीसीआर) भी तलब किया। वादी पक्ष भी विरोध में हुआ खड़ा
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र कुमार ने वकालतनामा दाखिल कर जेजे बोर्ड के फैसले का समर्थन किया और आरोपी पक्ष की अपील का विरोध किया। 15 जुलाई को दोनों पक्षों की विस्तृत बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसले पर टिकीं सबकी निगाहें
बुधवार को आने वाला फैसला पूरे मामले की दिशा तय करेगा। यदि स्पेशल पोक्सो कोर्ट जेजे बोर्ड के आदेश को बरकरार रखती है तो पारस सोम का ट्रायल बालिग आरोपी के रूप में आगे बढ़ेगा। वहीं यदि अदालत आरोपी पक्ष की दलीलों से सहमत होती है तो मामले में नई कानूनी स्थिति पैदा हो सकती है। वादी-प्रतिवादी का यह है कहना वादी पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र कुमार का कहना है कि दस्तावेज से उम्र का निर्णारण तब होता है, जब संबंधित व्यक्ति की वास्तविक पढ़ाई के सभी दस्तावेज उपलब्ध होते हैं। यहां तो कक्षा एक से चार तक का कोई रिकार्ड ही नहीं मिला। ऐसे में कैसे मान लें कि मौजूदा दस्तावेजों में उम्र ठीक लिखी है। जबकि जेजे बोर्ड भी इसी को आधार मानकर आरोपी को बालिग घोषित कर चुका है। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता बलराम सोम ने कहा कि हमने बहस पूरी कर दी है। ऐसे निर्णयों से जुड़ी पूर्व की कुछ रूलिंग भी प्रस्तुत की हैं। हर पहलू स्पष्ट कर दिया है। अब न्यायालय पर निर्भर करता है कि वह क्या निर्णय सुनाते हैं। मेरा मानना है कि परिणाम पॉजीटिव आना चाहिए। एक्ट भी इसी का समर्थन करता है।
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कपसाड़ कांड का आरोपी बालिग या नाबालिग, फैसला कल:पूरे जिले की नजर स्पेशल पोक्सो कोर्ट पर, दोनों पक्ष जीत का कर रहे दावा