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सम्राट पृथ्वीराज चौहान डिग्री कॉलेज में सोमवार को “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन ने किया, जिसमें सामाजिक समरसता और सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले करीब 20 समाजसेवियों को “समरसता सम्मान” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आरएसएस के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह ने की। मुख्य अतिथि आध्यात्मिक गुरु पवन सिन्हा रहे। पुरा महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी जय भगवान शर्मा और महर्षि वाल्मीकि आश्रम, लवकुश जन्मस्थली के महंत प्रेमदास महाराज ने भी आशीर्वचन दिए। पदम सिंह ने कहा कि सामाजिक समरसता भारतीय संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ ने अपने कार्य और आचरण से समाज को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास किया है। पवन सिन्हा ने कहा कि समरसता का अर्थ केवल भेदभाव समाप्त करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर सम्मान और आत्मीयता का भाव जगाना है। महंत प्रेमदास ने महंत अवेद्यनाथ के सामाजिक योगदान को याद करते हुए वंचित और उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम संयोजक एवं ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि गोरखनाथ मठ की परंपरा जाति-पाति और ऊंच-नीच के भेद को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ को दलित समाज से आने वाला बताते हुए इसे सामाजिक समरसता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना सामाजिक समरसता के बिना संभव नहीं है। प्रयागराज से शुरू हुआ “समरसता संवाद” अब तक लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अंबेडकर नगर, गाजियाबाद, जौनपुर और मेरठ में आयोजित हो चुका है।
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कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन:20 समाजसेवियों को मिला समरसता सम्मान, गोरक्षपीठ की भूमिका पर चर्चा