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सम्भल के सिरसी नगर पंचायत में रविवार को ईद-ए-ज़हरा का त्योहार श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस दौरान घरों में खुशी का माहौल रहा। देर रात शिया जामा मस्जिद में आयोजित विशेष महफिल के समापन पर यजीदी फौज के सरदारों के प्रतीकात्मक पुतलों का दहन किया गया। ये पुतले कर्बला में अहले-बैत (अ.स.) के परिजनों और साथियों की शहादत के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अजादार उपस्थित थे। शिया जामा मस्जिद में हुई महफिल को संबोधित करते हुए मौलाना गजनफर अब्बास ने ईद-ए-ज़हरा के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह दिन शिया समुदाय के लिए खुशी और जश्न का अवसर है। हजरत इमाम मेहंदी (अ.स.) की ताजपोशी से जुड़े इस दिन को समुदाय के लोग विशेष धार्मिक उत्साह के साथ मनाते हैं। पेश नमाज मौलाना हसीन अख्तर मेरठी ने कर्बला की घटना और उसके बाद अहले-बैत (अ.स.) के घर में व्याप्त गम का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके परिवार व साथियों की शहादत के बाद अहले-बैत ने लंबे समय तक शोक का सामना किया। अत्याचारियों के अंजाम की खबर मिलने के बाद उनके घर में खुशी लौटी। मौलाना काज़ी मोहम्मद नाज़िम और मौलाना काज़ी सुबहान ने भी ईद-ए-ज़हरा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। इस महफिल में बड़ी संख्या में अजादार शामिल हुए और धार्मिक कार्यक्रम देर रात तक जारी रहा। पुतला दहन के दौरान जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि कर्बला में अहले-बैत (अ.स.) के परिजनों और साथियों पर हुए अत्याचार की याद में ये प्रतीकात्मक पुतले जलाए गए। इस अवसर पर आतंकवाद, जुल्म और हिंसा के विरुद्ध संदेश देते हुए हक, इंसानियत, अमन और इंसाफ कायम रखने का आह्वान किया गया। यह आयोजन पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
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ईद-ए-ज़हरा पर यजीदी सरदारों के पुतले दहन:जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद, अमन-इंसाफ का संदेश