आगरा डीपीएस स्टूडेंट पर एफआईआर में तीन पुलिसकर्मी निलंबित:जेजे एक्ट का उल्लंघन में गिरी गाज, एफआईआर भी खारिज हुई


आगरा के थाना सिकंदरा स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में पंच मारकर दसवीं के छात्र के दांत और जबड़ा तोड़ने के मामले में पुलिस ने तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज की। इस एफआईआर के बाद पुलिस खुद कटघरे में खड़ी हो गई। सात साल से कम सजा वाले अपराध में बिना किशोर न्याय बोर्ड की रिपोर्ट के नाबालिग पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती, लेकिन पुलिसकर्मियों ने नियमों का पालन नहीं किया। इसके बाद दरोगा और दो पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए गए। वहीं थाना प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश देते हुए नाबालिग पर दर्ज प्राथमिकी को समाप्त कर दिया गया।
25 अप्रैल को डीपीएस में पढ़ने वाले 10वीं के छात्र का दूसरे छात्र ने मुंह पर पंच मारकर दांत तोड़ दिए थे। घायल छात्र के पिता पीयूष मल्होत्रा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं।
उन्होंने बताया- मेरा बेटा डीपीएस शास्त्रीपुरम में 10वीं क्लास में पढ़ता है। शनिवार को बेटा स्कूल गया था। सुबह साढे़ 7 बजे स्कूल से फोन आता है कि बेटे के हल्की चोट लग गई है। उसे स्कूल से ले जाएं। जब मैं स्कूल पहुंचा तो देखा बेटे के मुंह से खून निकल रहा था। स्कूल की आया बेटे को पकड़कर बैठी थी। मुंह में रूई ठूंसी हुई थी। उसे फर्स्ट एड तक नहीं दी गई थी। बेटे की हालत देखकर मैं घबरा गए। बेटे के क्लास में एक लड़के ने मुंह पर पंच मार दिया। इससे उसके 3 दांत टूट गए हैं। उसके जबडे़ में भी चोट है।
पिता बोले- बच्चा दर्द से चिल्लाता रहा, इलाज नहीं कराया पीयूष मल्होत्रा ने बेटे का वीडियो शेयर करते हुए कहा- आगरा डीपीएस में मेरे बच्चे का ये हाल हुआ है। प्रशासन और सोशल मीडिया के लोगों से भीख मांगता हूं कि आप इस वीडियो को फारवर्ड कर दीजिए। स्कूल की तरफ से घोर लापरवाही बरती गई। उन्होंने बच्चे को फर्स्ट एड तक नहीं दी। बच्चा दर्द से चिल्ला रहा था। उसे डॉक्टर को दिखाने के बजाए, फोन कर कह रहे हैं कि हल्की चोट लग गई है। उसे ले जाएं। स्कूल में बेटे को चोट लगने के बाद प्रिंसिपल ने बच्चे का हाल चाल तक नहीं पूछा। ये लाखों रुपए की फीस लेते हैं, लेकिन थोड़ा भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। ये पैरेंट्स को केवल दुधारू गाय समझते हैं।
तीन दिन बाद हुई थी एफआईआर
पीड़ित छात्र के पिता ने कार्रवाई न होने पर सोमवार को डीएम मनीष बंसल से मुलाकात की थी। डीएम ने स्कूल के खिलाफ जांच के लिए कमेटी बनाने की बात कही थी। हालांकि घटना के 3 दिन बाद पुलिस ने देर रात आरोपी छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पीड़ित के पिता ने एफआईआर में लिखा है कि उनके बेटे के तीन दांत टूट गए हैं। बेटा तीन महीने तक कुछ नहीं खा सकेगा। डर के चलते वो स्कूल जाने से डर रह है। वो मनोवैज्ञानिक रूप से संतुलित भी नहीं है।
तीन पुलिसकर्मी निलंबित
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि नाबालिग के मामले में किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें प्रावधान है कि गंभीर अपराध न होने पर सीधे प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती। लिखित शिकायत मिलने पर जीडी में तस्करा डाला जाना चाहिए। इसके बाद सोशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट दी जाती है। किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष नामजद किशोर को पेश किया जाता है और बोर्ड के आदेश के बाद आगे की कार्रवाई होती है। बोर्ड को ही तय करना होता है कि इस तरह के मामलों में प्राथमिकी दर्ज होगी या फिर काउंसिलिंग की जाएगी या मामला समाप्त किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर बाल कल्याण अधिकारी दरोगा मनीपाल सिंह, प्राथमिकी लिखने वाले मुंशी कमल चंदेल और सिपाही सनी धामा को निलंबित किया गया है। वहीं थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार त्रिपाठी की लापरवाही भी सामने आई है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

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