Taslima Nasrin Returns to Kolkata After Two Decades

कोलकाता5 मिनट पहले

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कोलकाता पहुंचने पर समर्थकों ने तसलीमा का स्वागत किया।  - Dainik Bhaskar

कोलकाता पहुंचने पर समर्थकों ने तसलीमा का स्वागत किया।

निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को नई दिल्ली से कोलकाता पहुंचीं। वे लगभग दो दशक बाद यहां लौटी हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मौजूद समर्थकों ने उनका स्वागत किया। लोगों का अभिवादन करते हुए तसलीमा ने कहा कि उन्हें वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है।

तसलीमा 1 अगस्त को होने वाले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी और मशहूर लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के शामिल होने की उम्मीद है।

कोलकाता एयरपोर्ट पर तसलीमा के फोटो

तसलीमा को 2007 में विरोध प्रदर्शन के चलते कोलकाता छोड़ना पड़ा था।

तसलीमा को 2007 में विरोध प्रदर्शन के चलते कोलकाता छोड़ना पड़ा था।

1993 में उनके उपन्यास लज्जा की वजह से उन्हें बांग्लादेश से निर्वासित होना पड़ा था।

1993 में उनके उपन्यास लज्जा की वजह से उन्हें बांग्लादेश से निर्वासित होना पड़ा था।

तसलीमा ने कहा कि कोलकाता उनका दूसका घर है।

तसलीमा ने कहा कि कोलकाता उनका दूसका घर है।

कोलकाता एयरपोर्ट पर तसलीमा के स्वागत के लिए समर्थक पहले ही पहुंच गए थे।

कोलकाता एयरपोर्ट पर तसलीमा के स्वागत के लिए समर्थक पहले ही पहुंच गए थे।

2007 में छोड़ना पड़ा था शहर

नवंबर 2007 में तस्लीमा को कोलकाता से बाहर जाना पड़ा था। उस समय उनकी आत्मकथा ‘द्विखंडित’ के खिलाफ इस्लामी समूहों ने हिंसक प्रदर्शन किए थे और किताब पर प्रतिबंध की मांग की थी।

इस विरोध के चलते तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें राज्य से बाहर भेज दिया था। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली ले जाया गया और फिर वे विदेश चली गई थीं।

1994 से निर्वासित जीवन जी रही

तस्लीमा तस्लीमा का जन्म बांग्लादेश के मयमनसिंह में हुआ था। वे 1994 से निर्वासित जीवन जी रही हैं। उनके लेखन के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलीं और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

उनके उपन्यास ‘लज्जा’ से उन्हें पहचान मिली। इस किताब में भारत में बाबरी विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न को दिखाया गया था, जिसका कट्टरपंथी समूहों ने कड़ा विरोध किया था।

कोलकाता को मानती हैं अपना दूसरा घर

तस्लीमा ने कई बार कोलकाता लौटने की इच्छा जताई है। वे अक्सर इस शहर को अपना दूसरा घर बताती रही हैं।

वे अभिव्यक्ति की आजादी, धर्मनिरपेक्षता, महिला अधिकारों और धर्म व राज्य को अलग रखने की वकालत करती रही हैं।

करीब 19 साल बाद उनकी यह यात्रा दक्षिण एशिया में अभिव्यक्ति की आजादी और निर्वासित लेखकों के मुद्दों पर हो रही चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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कोलकाता।

तसलीमा को 2007 में विरोध प्रदर्शनों के कारण कोलकाता छोड़ना पड़ा था।

तसलीमा को 2007 में विरोध प्रदर्शनों के कारण कोलकाता छोड़ना पड़ा था।

निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता लौटी हैं। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए अपने देश लौटने जैसा है। मैं खुशी और दर्द दोनों के साथ लौटी हूं।

तस्लीमा 1 अगस्त को एक कार्यक्रम में शामिल होंगी। इसमें पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी और लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय भी शामिल होंगे। पढ़ें पूरी खबर…

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