सुप्रीम कोर्ट के फैसले अब सुनकर भी समझ सकेंगे:आसान हिंदी में आदेश का ऑडियो-वीडियो जारी होगा; हिंदी दिवस पर जन सूचना सेवा की घोषणा


सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी दिवस के मौके पर जल्द ‘जन सूचना सेवा’ शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत कोर्ट के बड़े फैसलों और आदेशों की जानकारी आसान हिंदी में छोटे ऑडियो और वीडियो के जरिए लोगों तक पहुंचाई जाएगी। इस पहल का मकसद कोर्ट के फैसलों को आम लोगों के लिए समझना आसान बनाना है। इसकी शुरुआत हिंदी से होगी और बाद में यह सेवा दूसरी भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह सेवा खासतौर पर दिव्यांग लोगों के लिए लाई जा रही है। क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले अब तक हिंदी में नहीं मिलते थे, जानिए ऐसे 7 सवालों के जवाब… सवाल: ‘जन सूचना सेवा’ में क्या मिलेगा? जवाब: सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसलों और आदेशों का सार आसान हिंदी में बताया जाएगा। इसके लिए छोटे ऑडियो और वीडियो बुलेटिन तैयार किए जाएंगे, ताकि कानूनी भाषा समझने में दिक्कत न हो। सवाल: क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले अब तक हिंदी में नहीं मिलते थे? जवाब: सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के हिंदी संस्करण पहले से उपलब्ध कराए जाते रहे हैं। कोर्ट की वेबसाइट पर हिंदी में कंटेंट भी मौजूद है। नई पहल में फर्क यह है कि फैसलों को सिर्फ ट्रांसलेशन में देने के बजाय आसान, बोलचाल वाली हिंदी भाषा में ऑडियो-वीडियो के जरिए समझाया जाएगा। सवाल: सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक भाषा क्या है? जवाब: संविधान के अनुच्छेद 348 के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की कार्यवाही की भाषा अंग्रेजी है। अदालत के आधिकारिक फैसलों और आदेशों के लिए भी अंग्रेजी की व्यवस्था लागू है। हालांकि, आम लोगों तक न्यायिक जानकारी पहुंचाने के लिए भारतीय भाषाओं में अनुवाद और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रही हैं। सवाल: यह पहल क्यों जरूरी है? जवाब: अदालतों के फैसलों में कानूनी शब्दावली और जटिल भाषा होती है। ऐसे में आम व्यक्ति के लिए फैसला सीधे पढ़कर समझना मुश्किल हो सकता है। आसान हिंदी में ऑडियो-वीडियो बुलेटिन से फैसले का मतलब जल्दी समझने में मदद मिलेगी। सवाल: किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा? जवाब: आम नागरिकों के अलावा वकीलों और उन लोगों को फायदा होगा जिन्हें कानूनी अंग्रेजी समझने में परेशानी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने खासतौर पर दिव्यांगजनों की पहुंच को भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। सवाल: क्या सेवा सिर्फ हिंदी में रहेगी? जवाब: नहीं। शुरुआत हिंदी से की जाएगी, लेकिन बाद में अन्य भारतीय भाषाओं में भी इसका विस्तार करने की योजना है। इससे अलग-अलग राज्यों के लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों को समझना आसान होगा। सवाल: क्या यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट भारतीय भाषाओं पर जोर दे रहा है? जवाब: नहीं। सुप्रीम कोर्ट पहले से ही फैसलों के हिंदी समेत भारतीय भाषाओं में संस्करण उपलब्ध कराने की दिशा में काम करता रहा है। ‘जन सूचना सेवा’ उसी प्रयास को आगे बढ़ाने वाली पहल है, जिसमें भाषा के साथ-साथ ऑडियो और वीडियो माध्यम का इस्तेमाल किया जाएगा।

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