नई दिल्ली7 मिनट पहले
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नई दिल्ली में NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज 13 FIR रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज 1 सितंबर को सुनवाई करेगा। यह मांग भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की थी।
पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई FIR दर्ज करने की परमिशन भी मांगी है।
CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मंगलवार को मामले की तत्काल सुनवाई को मंजूरी दी थी। बेंच ने कहा कि अगर पक्षकार आपस में सहमति बना रहे हैं, तो उसे कोई परेशानी नहीं है।
SG मेहता ने कहा, “हम एक IA (इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन) दाखिल करना चाहते हैं। यह प्रदर्शन से जुड़ा है और FIR रद्द करने के लिए है। हम संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहे हैं।”
आवेदन में कहा गया है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के अनुसार, दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR आगे नहीं चलाना चाहती।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके 5 सितंबर को दिल्ली मार्च का ऐलान किया है।
दिल्ली पुलिस का दावा- 2800 से ज्यादा क्रिमिनल पहचाने गए
दिल्ली पुलिस ने आवेदन में कहा, “नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के डेटाबेस के अनुसार, क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले लोगों के प्रदर्शन स्थल पर मौजूद होने की जानकारी मिली है। यह पता लगाने के लिए जांच जरूरी है कि इन लोगों की प्रदर्शन के दौरान लोगों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने या संपत्ति नष्ट करने से जुड़े अपराधों में कोई भूमिका थी या नहीं।”
आवेदन में कहा गया, “दिल्ली पुलिस केवल इन 2,873 लोगों के लिए नई FIR दर्ज करने की अनुमति चाहती है। इस नई और खास FIR की जांच ‘क्रिमिनल बैकग्राउंड’ शब्द की स्पष्ट परिभाषा के अनुसार होगी।”
दिल्ली पुलिस ने कहा कि कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। जनहित और इस मामले के खास तथ्यों को देखते हुए आवेदक संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत इस कोर्ट के असाधारण अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है। FIR रद्द करने और नई FIR दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की जा रही है।”
इसमें कोर्ट से यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई कि उसका आदेश इस मामले के खास तथ्यों तक सीमित रहेगा और इसे आगे के मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा।

CJP ने टीचर्स डे पर दिल्ली में दोबारा मार्च बुलाया
कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में सितंबर में एक बार फिर प्रदर्शन मार्च बुलाया है। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कराने के लिए किए गए वादे पूरे नहीं किए।
CJP के अनुसार, यह मार्च 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर निकाला जाएगा। इसका नेतृत्व उन छात्रों के परिवार करेंगे, जिन्होंने NEET परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद आत्महत्या की थी।
मार्च में उन छात्रों के परिवार भी शामिल होंगे, जिन्होंने जुलाई के आंदोलन के दौरान पुलिस ज्यादती का आरोप लगाया था।
NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक हाईपावर्ड जांच कमेटी बनाई थी। समिति को NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों और आरोपों की जांच करनी थी। इन आरोपों में छात्रों के खिलाफ पुलिस ज्यादती का मामला भी शामिल था।
3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को रिहा करने से जुड़े अपने आदेश में ‘आपराधिक पृष्ठभूमि’ शब्द का मतलब साफ किया था। कोर्ट ने कहा था कि इसका मतलब केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों से है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्य सरकारें बाकी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR कानून के अनुसार बंद या वापस ले सकती हैं।
यह सफाई केंद्र के उस बयान के बाद आई थी, जिसमें कहा गया था कि वह NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में शामिल छात्रों के खिलाफ FIR आगे नहीं चलाने को लेकर गंभीर है। इसमें 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च करने वाले छात्र भी शामिल थे, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों में झड़प
20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में दिल्ली में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को हटाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठियां और आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए थे।
छात्रों का यह प्रदर्शन कई शहरों तक फैल गया था। इसकी मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी।
यह आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। प्रधान के इस्तीफा देने और सरकार के CJP की दूसरी मांगें मानने के बाद 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कर दिया गया था।
