Patiala Farmer Daughter Simrandeep Kaur UPSC Rank 15

सिमरनदीप, जिसने UPSC परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की।

पटियाला के छोटे से गांव बिरारवाल की बेटी सिमरनदीप कौर ने UPSC परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली सिमरनदीप को इस उपलब्धि के लिए पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने 22 जून को सम्मानित किया।

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सम्मान समारोह के दौरान बेटी को सम्मानित होते देख पिता कुलदीप सिंह की आंखें खुशी से नम हो गईं। सिमरनदीप की सफलता का सफर संघर्ष, धैर्य और लगातार 4 प्रयासों की मेहनत से होकर गुजरा है।

पहले के प्रयासों में उन्होंने प्रीलिम्स तो निकाल लिए, लेकिन मेन्स में सफल नहीं हो पाई थीं। 3 बार फेल होने के बाद उन्होंने टॉपरों की कॉपियों से उत्तर देने के तरीके कॉपी किए। इससे उन्होंने अपनी कमियों को दूर कर सफलता पाई।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। अब उनका सपना IAS अधिकारी बनकर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए काम करना है। उनकी कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने सिमरनदीप को सम्मानित किया।

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने सिमरनदीप को सम्मानित किया।

एक मुलाकात ने बदल दी जिंदगी की दिशा

सिमरनदीप जब 12वीं कक्षा (मेडिकल) में पढ़ रही थीं, तब उनके स्कूल में एक PCS अधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। अधिकारी के रुतबे, विचारों और समाज के लिए काम करने की भावना ने उन पर गहरा प्रभाव डाला। उसी दिन उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया।

खालसा कॉलेज से पढ़ाई, चौथे प्रयास में मिली सफलता

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सिमरनदीप ने पटियाला के खालसा कॉलेज से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन (स्नातकोत्तर) की पढ़ाई की। UPSC की यह उनकी चौथी कोशिश थी। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार देशभर में 15वीं रैंक हासिल कर ली।

किसान पिता और गृहिणी मां ने दिया पूरा साथ

सिमरनदीप के पिता कुलदीप सिंह किसान हैं, जबकि उनकी मां अमनदीप कौर गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक सीमाओं के बावजूद माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई और तैयारी में कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने हर कदम पर सिमरनदीप का हौसला बढ़ाया।

संकल्प संस्थान बना तैयारी का सहारा

इस परीक्षा की तैयारी करना और उसका लाखों का खर्च उठाना एक किसान परिवार के लिए आसान नहीं था। इसके लिए साल 2022 में संकल्प संस्थान ने सिमरनदीप की मदद की। संस्थान की ओर से मुफ्त कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। मेहनत, सही दिशा और परिवार के सहयोग ने उनकी सफलता की राह आसान बनाई।

कंसिस्टेंसी और रिवीजन पर जोर दिया

उन्होंने बिना किसी क्लासरूम कोचिंग के घर से पढ़ाई की। उन्होंने औसतन 8-10 घंटे पढ़ाई की, लेकिन उनका मानना है कि घंटों के बजाय कंसिस्टेंसी (निरंतरता) ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने सीमित संसाधनों (कम किताबें) और बार-बार रिवीजन पर जोर दिया। हर टॉपिक के लिए 2 पेज से ज्यादा के नोट्स नहीं बनाए और प्रीलिम्स के लिए थ्री-राउंड सिस्टम अपनाया। उनका ऑप्शनल विषय राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध (PSIR) था।

IAS बनकर ग्रामीण विकास पर करना चाहती हैं काम

सिमरनदीप का कहना है कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल होकर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए काम करना चाहती हैं। किसान परिवार से होने के कारण वह गांवों की समस्याओं और जरूरतों को अच्छी तरह समझती हैं।

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