IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के पैतृक आवास पर ED की तलाशी।
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती में कथित गड़बड़ियों की जांच रविवार को बरेली तक पहुंच गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने नवाबगंज क्षेत्र के हिमकरपुर चमरुआ गांव स्थित 2016 बैच के IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के पैतृक आवास पर तलाशी ली। ED
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KPSC भर्ती घोटाले की जांच में बरेली तक पहुंची ED की कार्रवाई।
लखनऊ नंबर की गाड़ियों से पहुंची टीम, गांव में मची हलचल रविवार दोपहर कई गाड़ियों से ED की टीम हिमकरपुर चमरुआ पहुंची। टीम के साथ पुलिस बल भी था। अधिकारियों ने सीधे गंगवार के पैतृक आवास में प्रवेश किया और दस्तावेजों समेत अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही गांव में हलचल बढ़ गई। घर के आसपास लोगों की आवाजाही सीमित रखी गई। ED ने रविवार को IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित परिसरों की तलाशी ली। कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत चल रही जांच से जुड़ी है।
कौन हैं IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के IAS अधिकारी और कर्नाटक कैडर के हैं। वे UPSC Civil Services Examination के जरिए IAS में आए। उनका होम स्टेट उत्तर प्रदेश के बरेली में है। गंगवार KPSC में Controller of Examinations यानी परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। जनवरी 2025 के कर्नाटक सरकार के एक आधिकारिक पदोन्नति आदेश में भी उन्हें KPSC के Controller of Examinations का अतिरिक्त प्रभार संभालते हुए दर्ज किया गया था। मार्च 2026 में उन्हें इस पद से बदल दिया गया। ED की कार्रवाई के समय उनकी वर्तमान पोस्टिंग कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में Director-MSME के तौर पर बताई गई है।
आखिर कौन-सा पेपर लीक मामला है? यह किसी सामान्य KPSC परीक्षा का पेपर लीक मामला नहीं है। जांच कर्नाटक में 400 Veterinary Officers की भर्ती परीक्षा से जुड़ी है। KPSC ने इन पदों के लिए 8 और 9 जनवरी 2026 को परीक्षा कराई थी। 17 जुलाई को 400 पदों की अंतिम चयन सूची जारी की गई। इसके बाद परीक्षा और चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर 70 से 80 लाख रुपए तक मांगे गए। कुछ मामलों में रकम 80 लाख से एक करोड़ रुपए तक होने के आरोप भी सामने आए। शिकायतकर्ताओं ने कथित बिचौलियों की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच एजेंसियों को दी।
पेपर लीक के साथ OMR में छेड़छाड़ का भी आरोप इस मामले में सिर्फ प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप नहीं है। FIR और जांच में पेपर लीक, OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित छेड़छाड़, अभ्यर्थियों की गोपनीय जानकारी लीक करने और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप शामिल हैं। कुछ ऐसे अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल उठे, जिनके शैक्षणिक रिकॉर्ड सामान्य होने के बावजूद बहुत अधिक अंक आने की बात कही गई। जांच का एक अहम हिस्सा डिजिटल मूल्यांकन से भी जुड़ा है। ED ने KPSC के अलावा परीक्षा की कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन से जुड़ी कंपनी के परिसरों पर भी तलाशी ली थी।
18 अगस्त को 21 ठिकानों पर पहुंची थी ED इस मामले में ED ने 18 अगस्त को कर्नाटक और गुजरात के अहमदाबाद समेत 21 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इनमें KPSC कार्यालय, निलंबित KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकर का आवास, KPSC सदस्य शांता होस्मानी, कथित बिचौलियों, डिजिटल मूल्यांकन से जुड़ी कंपनी और चयनित Veterinary Officers से जुड़े परिसर शामिल थे। कर्नाटक सरकार ने इससे पहले मामले की जांच CID को सौंपी थी। पुलिस के स्तर पर भी भर्ती प्रक्रिया में कथित पेपर लीक और OMR से छेड़छाड़ की शिकायतों पर FIR दर्ज हुई थी।
गंगवार की भूमिका क्या है? गंगवार का नाम जांच में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे उस समय KPSC में परीक्षा नियंत्रक थे, जब भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया उनके पद से जुड़ी थी। हालांकि, ED की तलाशी को उनके खिलाफ अपराध साबित होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने 22 अगस्त को कहा था कि गंगवार के खिलाफ फिलहाल कोई आरोप नहीं है। उन्होंने यह भी बताया था कि गंगवार कुछ समय से संपर्क में नहीं थे और बाद में पता चला कि वे अपने पिता की तबीयत खराब होने के कारण उत्तर प्रदेश आए थे।
बरेली में क्या मिला, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं बरेली स्थित पैतृक आवास पर ED की तलाशी के दौरान टीम ने किन दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच की, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। तलाशी में क्या बरामद हुआ और उसका KPSC भर्ती मामले से क्या संबंध है, इस पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। फिलहाल जांच का केंद्र 400 Veterinary Officers की भर्ती में कथित रिश्वतखोरी, पेपर लीक, OMR छेड़छाड़ और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप हैं। बरेली की कार्रवाई इसी मामले के मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच का हिस्सा है।