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KGMU कार्य परिषद की बैठक के तीन महीने बाद भी फैसले लागू न होने पर सदस्यों ने जताई आपत्ति।
KGMU में कुलपति और कुलसचिव के बीच प्रशासनिक खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। मंगलवार को कार्य परिषद की बैठक हुई। जिसमें कार्यपरिषद के सदस्यों ने कुलसचिव स्तर पर कर्मचारियों के रेगुलराइजेशन के फैसले के अनुपालन में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। सदस्
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देरी को लेकर जताई नाराजगी
कुलपति डॉ.सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक हुई। बैठक में वरिष्ठ सदस्य डॉ.ओपी सिंह ने कहा कि कार्य परिषद के कई निर्णयों का जानबूझकर रोका गया है। उन्होंने विशेष रूप से कर्मचारियों के रेगुलराइजेशन के मामले को उठाया। परिषद के अनुसार मई में इस संबंध में आदेश जारी हो जाना चाहिए था। लेकिन अब तक कुलसचिव कार्यालय की ओर से आदेश जारी नहीं किया गया। देरी से कर्मचारियों का अहित हो रहा है। उन्हें मानकीकरण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। परिषद के सभी सदस्यों ने डॉ. ओपी की आपत्तियों का समर्थन किया। परिषद ने सर्वसम्मति से लंबित सभी निर्णयों का तत्काल अनुपालन कराने की मांग की। साथ ही कुलपति से कहा गया कि कुलसचिव पर प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करें। ताकि भविष्य में परिषद के फैसलों में बेवजह देरी न हो।
अपील करेगा विश्वविद्यालय
बैठक में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर पद से बर्खास्त डॉ. केपी सिंह के मामले पर भी चर्चा हुई। उच्च न्यायालय ने उनकी सेवा से बर्खास्तगी का आदेश निरस्त करते हुए पुनः विभागीय जांच कराने और प्रतिपरीक्षण का अवसर देने का निर्देश दिया था। इस पर कार्य परिषद ने सर्वसम्मति से विश्वविद्यालय एकल पीठ के आदेश के बाद खंडपीठ में विशेष अपील दाखिल करेगा। साथ ही न्यायालय में विश्वविद्यालय का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता की सेवाएं लेने का भी निर्णय किया गया।