KGMU Experts: Smoking Causes Cancer

KGMU में एक्सपर्ट्स बोले- चीन की नई कैंसर रोधी दवाओं से इलाज को मिलेगी नई दिशा।

कैंसर के इलाज के क्षेत्र में जल्द ही एक नई उम्मीद देखने को मिल सकती है। चीन में विकसित की गई नई कैंसर रोधी दवाएं विभिन्न प्रकार के कैंसर पर सीधे और प्रभावी तरीके से हमला करने में सक्षम बताई जा रही हैं। इन दवाओं के भारतीय बाजार में आने से कैंसर मरीजों

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KGMU के कलाम सेंटर में जार्जियन एल्युमनाय एसोसिएशन की तरफ से कार्यशाला हुई। आयोजक सचिव डॉ.सुधीर सिंह ने बताया कि नई दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय कर कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ लड़ने में मदद करती हैं। दवा की निर्धारित डोज लेने के बाद शरीर में ऐसी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित होती है, जो कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट करने का प्रयास करती है। इससे इलाज की प्रभावशीलता बढ़ने की संभावना है।

कैंसर को लेकर रहना होगा अलर्ट

डॉ.सुधीर ने बताया कि इन दवाओं की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि वे ट्यूमर तक पहुंचने वाली रक्त आपूर्ति को बाधित करती हैं। ट्यूमर को बढ़ने और फैलने के लिए लगातार रक्त और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। नई दवाएं इस सप्लाई को रोककर कैंसर की वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।

डॉ.सुधीर सिंह के अनुसार फेफड़े, पेट और शरीर के अन्य अंगों में होने वाले कई प्रकार के कैंसर में इन दवाओं के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इसके अलावा रक्त कैंसर के कुछ प्रकारों में भी इनके प्रभावी होने की संभावना जताई जा रही है। प्रारंभिक अध्ययनों और परीक्षणों में मरीजों की स्थिति में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।

कुलपति प्रो.सोनिया नित्यानंद ने एलुमनी एसोसिएशन के कार्यक्रम को सार्थक बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में उपचार के साथ साथ रोकथाम की समझ बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

धूम्रपान से बनाना होगी दूरी

KGMU रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने कहाकि बीडी और सिगरेट फेफड़े के कैंसर के लिए जिम्मेदार है। लिहाजा धूम्रपान से तौबा करें। कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ.एमएलबी भट्ट ने कहा कि कैंसर के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। जीवनशैली में सुधार कर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

ये भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में कैंसर संस्थान के डॉ. प्रमोद कुमार, KGMU प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार, डॉ. उमा सिंह, हड्डी रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जीके सिंह, डॉ. विनीत शर्मा समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।

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