हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ और नासिक-त्र्यंबकेश्वर के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। देश के सबसे बड़े अखाड़ों में शामिल जूना अखाड़ा समेत काशी के सभी प्रमुख अखाड़ों ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया श
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इन मुद्दों पर होगी चर्चा
बैठक में अखाड़ों की ओर से कुंभ मेले में टेंट निर्माण, संतों के आवास, कोठारियों की रवानगी, भूमि आवंटन, सुरक्षा, भोजन, चिकित्सा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई जाएगी। जूना अखाड़े के प्रधान कार्यालय काशी में होने के कारण यह बैठक विशेष महत्व रखती है।
आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद महाराज की रहेगी मौजूदगी
बैठक में अखाड़ा परिषद के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज के साथ हरि गिरि, प्रेम गिरि, उमाशंकर भारती, महेशपुरी, शिवानंद, आनंदपुरी और शिवगिरि सहित करीब 20 महामंडलेश्वर, श्रीमहंत तथा अखाड़े की 52 सदस्यीय प्रबंधन समिति भी हिस्सा लेगी। बैठक में कुंभ की धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ प्रशासनिक और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का भी बंटवारा किया जाएगा।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज करेगे बैठक की अध्यक्षता।
दो महीने पहले हरिद्वार पहुंचने लगेंगे संतों के जत्थे
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन भारती के अनुसार हरिद्वार में भूमि आवंटन की प्रक्रिया जारी है। नवंबर तक अखाड़ों के विशाल टेंट, रसोई, साधु-संतों के आवास और अन्य अस्थायी संरचनाओं का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद देशभर से साधु-संतों के जत्थे हरिद्वार पहुंचने लगेंगे और करीब दो महीने तक वहां प्रवास कर तप, साधना तथा प्रमुख स्नानों में भाग लेंगे।
हरिद्वार और नासिक दोनों कुंभ के लिए अलग रणनीति
अगले वर्ष 14 जनवरी (मकर संक्रांति) से 20 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा) तक हरिद्वार में अर्धकुंभ आयोजित होगा। इस दौरान 10 प्रमुख स्नान पर्व होंगे, जिनमें करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। वहीं नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ का औपचारिक शुभारंभ इसी वर्ष 31 अक्तूबर को ध्वजारोहण के साथ होगा, जबकि मुख्य आयोजन अगस्त से सितंबर के बीच रहेगा। सावन-भादो के दौरान होने वाले इस मेले में भारी बारिश बड़ी चुनौती होती है। इसी कारण अखाड़े पहले से मजबूत टेंट, जलनिकासी और अन्य सुविधाओं की तैयारी कर रहे हैं। कई अखाड़ों के नासिक में स्थायी भवन भी मौजूद हैं, जिससे व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

काशी के 13 अखाड़ों ने संभाली तैयारी की कमान
वाराणसी में कुल 13 अखाड़ों की उपस्थिति है, जिनमें से आठ के प्रधान कार्यालय यहीं स्थित हैं, जबकि शेष की प्रमुख शाखाएं हैं। जूना अखाड़े के अलावा निरंजनी, आह्वान, अटल, निर्वाणी, अग्नि, आनंद और विभिन्न वैष्णव अखाड़ों ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। सभी अखाड़े लगातार बैठकें कर कुंभ स्थलों पर संतों और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाओं की योजना बना रहे हैं।